पाइरोजीनियम (Pyrogenium)
परिचय-
पाइरोजीनियम औषधि सांड के सड़े हुए चर्बीहीन मांस से बनाई जाती है। यह औषधि बनाने के लिए इस मांस को दो सप्ताहों तक धूप में रखकर शक्तिकृत किया जाता है। इस औषधि को सड़े हुए पीब को शक्तिकृत करके भी बनाया जा सकता है। चिकित्सा के क्षेत्र में इस औषधि का उपयोग विशेषकर उस रोग को ठीक करने के लिए किया जाता है, जब प्रसूत के ज्वर में एक के बाद दूसरी कोई सुनिश्चित औषधि का उपयोग करने के बाद भी रोग ठीक नहीं होता है, ऐसी अवस्था में पाइरोजीनियम औषधि की एक खुराक 200 शक्ति देने से रोगी स्त्री को लाभ मिलता है और ज्वर ठीक हो जाता है।
प्रसव अथवा ऑपे्रशन के बाद या किसी प्रकार की सड़ी हुई बदबू सूंघने से सारे शरीर का खून दूषित हो तब पाइरोजीनियम औषधि का उपयोग करने से रोगी को अधिक लाभ मिलता है।
दूषित गन्दगी या नालियों की गन्दगी लगने के कारण उत्पन्न रोगों को ठीक करने के लिए पाइरोजीनियम औषधि का उपयोग किया जाता है।
पाइरोजीनियम औषधि का उपयोग ऐसी बीमारियों को ठीक करने के लिए भी किया जाता है जो दूषित वायु, गैस या रक्त के दूषित होने के कारण उत्पन्न होते हैं।
यदि किसी रोगी को अपना बिस्तर कड़ा महसूस होता है और रोगी जिस अंग पर अपना भार देकर सोता है उस अंग पर कुचलने या जख्म होने की तरह दर्द होता है, हिलने-डुलने पर यह दर्द कुछ कम हो जाता है। ऐसे लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग के लक्षणों को ठीक करने के लिए पाइरोजीनियम औषधि का उपयोग लाभदायक है।
इस औषधि का उपयोग शल्य चिकित्सा में भी किया जा सकता है जब शल्यकर्म करने के बाद की अवस्था जिनमें खून दूषित हो जाता है तथा मवाद आना शुरू हो जाता है।
विभिन्न लक्षणों में पाइरोजीनियम औषधि का उपयोग-
मन से सम्बन्धित लक्षण :- रोगी के स्वभाव में उतावलापन तथा मानसिक असन्तुलन होता है। रोगी अधिक बोलता है। रोगी ऐसा सोचता है कि उसके पास बहुत अधिक धन है। बेचैन रहता है और ऐसा लगता है जैसे उसके बहुत सारे हाथ-पैर निकल आये हैं। कोई भी यह नहीं कह सकता है कि वह जाग रहा है या नींद की अवस्था में है।
सिर से सम्बन्धित लक्षण :- सिर में दर्द होने के साथ ही कंपन होता है। नथुनों में पंखें जैसी फड़फड़ाहट होती है। रोगी को बेचैनी होने के साथ ही सिर में फाड़ देने जैसा दर्द होता है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग लक्षणों को ठीक करने के लिए पाइरोजीनियम औषधि का प्रयोग करना चाहिए।
मुंह से सम्बन्धित लक्षण :- रोगी की जीभ लाल और सूखी रहती है, जीभ साफ, फटी हुई तथा चिकनी दिखाई पड़ती है। गला सूखकर ऐसा लगता है कि वह बेलनाकार हो गया है, जी मिचलाने के साथ ही उल्टी आती है, जीभ का स्वाद सड़ा हुआ लगता है, सांस से तेज बदबू आती है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए पाइरोजीनियम औषधि का प्रयोग करना फायदेमन्द होता है।
जीभ से सम्बन्धित लक्षण :- रोगी को जीभ बड़ी मुलायम, साफ और चिकनी महसूस होती है तथा जीभ आग की तरह सुर्ख और चिटकी हुई रहती है, बात करने में परेशानी होती है। जीभ का स्वाद मीठा या मवाद की तरह बदबूदार होती है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग के लक्षणों को ठीक करने के लिए पाइरोजीनियम औषधि का प्रयोग करना लाभदायक होता है।
आमाशय से सम्बन्धित लक्षण :- रोगी कॉफी के तलछट जैसा उल्टी करता है, ऐसा लगता है जैसे आमाशय में पानी गर्म हो रहा है और वैसे ही उल्टी आ जाती है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए पाइरोजीनियम औषधि का प्रयोग करना उचित होता है।
पेट से सम्बन्धित लक्षण :- मूत्राशय तथा मलांत दोनों में असहनीय ऐंठन होती है और पेट फूला हुआ जलन युक्त होता है तथा इसके साथ ही पेट में दर्द होता है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित का उपचार करने के लिए पाइरोजीनियम औषधि का प्रयोग करना चाहिए।
मल से सम्बन्धित लक्षण :- दस्त हो जाता है तथा मल से अधिक बदबू आती है, मल कत्थई-काला होता है, पेट में दर्द होता रहता है। कब्ज की शिकायत रहती है तथा मल मलाशय में जमने लगता है जिसके कारण मलत्याग करने में परेशानी होती है, मल से काला सड़े हुए मुर्दे जैसा या छोटी-छोटी काली-काली गोलियों की तरह होता है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित का उपचार करने के लिए पाइरोजीनियम औषधि का प्रयोग करना फायदेमन्द होता है।
हृदय से सम्बन्धित लक्षण :- हृदय में कंपन होता है। हृदय का भाग अत्यधिक भरा हुआ महसूस होता है, रोगी हृदय की गति को साफ-साफ सुन सकता है। नाड़ी अस्वाभाविक रूप से तेज, शरीर के ताप के अनुपात में बहुत अधिक हो जाता है, बायें चूचक के चारों और दर्द होता है। सेप्टिक बुखार से पीड़ित रोगी की दिल की धड़कन कम धड़कती है, ऐसा महसूस होता है जैसे दिल बैठा जा रहा हो, नब्ज की गति अनियमित हो जाती है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग के लक्षणों को ठीक करने के लिए पाइरोजीनियम औषधि का प्रयोग करना लाभदायक होता है।
स्त्री रोग से सम्बन्धित लक्षण :- प्रसव होने के बाद पेट में सूजन आ जाती है तथा अधिक बदबू भी आती है, गर्भपात होने के साथ ही विषैला खून भी निकलता है। मासिकस्राव बदबूदार होती है। गर्भाशय से खून बहने लगता है। गुप्त वस्तिगन्हरीय में जलन होने के कारण मासिकस्राव के समय में हर बार बुखार आ जाता है। प्रसव होने के बाद दूषितरक्त का संक्रमण होता है। वस्तिगन्हरी में पथरी हो जाती है तथा इसके साथ ही जलन भी होती है। जलन की अवस्था के साथ ही स्राव होता है तथा शल्योत्तर अवस्थायें फैल जाती है और साथ ही गम्भीर विषैला खून शरीर में फैलने लगता है। गर्भाशय में यदि भ्रूण मर कर बहुत दिनों तक न निकले और सड़ता रहे तो उसे निकाल देने के लिए पाइरोजीनियम औषधि लाभदायक है। प्रसव या गर्भपात के बाद यदि खेड़ी का कुछ भाग गर्भाशय के अन्दर रह कर सड़े और सेप्टिक बुखार हो जाता है तब भी इसका उपयोग कर सकते हैं। प्रसव होने के बाद गर्भाशय से मैला पानी बहना, इसको ल्यूकोरिया कहते हैं उसमें बड़ी ही दुर्गन्ध रहती है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए पाइरोजीनियम औषधि का प्रयोग करना उचित होता है।
ज्वर से सम्बन्धित लक्षण :- ठण्ड अधिक लगती है तथा इसके साथ ही विषरक्तक बुखार उत्पन्न हो जाता है। गुप्त पूयजनक अवस्था उत्पन्न हो जाती है। पीठ से ठण्ड लगना शुरू होता है और शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है। उच्च ज्वर के साथ अधिक मात्रा में गर्म पसीना आता है लेकिन उससे भी ज्वर नहीं घटता है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग के लक्षणों को ठीक करने के लिए पाइरोजीनियम औषधि का प्रयोग करना चाहिए।
शरीर के बाहरी अंगों से सम्बन्धित लक्षण :- गर्दन की रक्तवाहिकाओं में कंपन होता है। हाथों, बांहों और पैरों में सुन्नपन होने लगता है। शरीर के सभी अंगों और हडि्डयों में दर्द होता है। सोने पर बिस्तर अधिक कठोर मालूम पड़ता है, सुबह के समय में अधिक कमजोरी महसूस होती है। शरीर में दर्द होता है और गति करने से दर्द कम होता है। शरीर में दूषित खून फैलने लगता है जिसके कारण तेजी से उत्पन्न होने वाला पीठ में घाव जो बिस्तर पर सोने के कारण होता है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित का उपचार करने के लिए पाइरोजीनियम औषधि का प्रयोग करना लाभदायक होता है।
चर्म रोग से सम्बन्धित लक्षण :- थोड़ा-सा कट जाने या चोट लग जाने पर त्वचा बुरी तरह से सूज जाती है, त्वचा पर जलन होती है, घाव हो जाते हैं। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए पाइरोजीनियम औषधि का प्रयोग करना उचित होता है।
नींद से सम्बन्धित लक्षण :- रोगी ऐसा लगता है जैसे आधी नींद में है और सारी रात सपने देखता रहता है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित का उपचार करने के लिए पाइरोजीनियम औषधि का प्रयोग करना फायदेमन्द होता है।
उल्टी से सम्बन्धित लक्षण :- रोगी को उल्टी आती है और उल्टी में पित्त, खून तथा सड़ी हुई चीजें या काफी के बुरादे जैसे पदार्थ निकलते हैं। पीया हुआ पानी पेट में गर्म होने पर उल्टी हो जाती है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए पाइरोजीनियम औषधि का प्रयोग करना चाहिए।
कब्ज से सम्बन्धित लक्षण :- रोगी का मल बड़ा, काला और सड़े हुए मांस की तरह बदबूदार, जैतून के फल की तरह गोल-गोल मेंगनी की तरह होता है, इसके साथ ही कब्ज की समस्या भी हो जाती है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए पाइरोजीनियम औषधि का प्रयोग करना उचित होता है।
ठण्ड से सम्बन्धित लक्षण :- ठण्ड के मौसम में कंधों के बीच से ठण्ड लगती है और ठण्डी रजाई छूते ही जाड़ा मालूम होने लगता है, बिछोना कड़ा महसूस होता है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए पाइरोजीनियम औषधि का प्रयोग करे।
उत्ताप से सम्बन्धित लक्षण :- जब ठण्ड लगना शुरू होता है उसी समय से बार-बार पेशाब आता है, गाल सुर्ख हो जाता है, शरीर का टेम्प्रेचर (टेम्परेंचर) 103 से 106 तक होता है, नब्ज कमजोर और उसकी चाल बहुत तेज 140 से 170 होती है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए पाइरोजीनियम औषधि का प्रयोग करना चाहिए।
पसीना से सम्बन्धित लक्षण :- पसीना बहुत ज्यादा आता है, कमजोरी महसूस होने लगती है तथा पसीने से बदबू आती है। ऐसे लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए पाइरोजीनियम औषधि का प्रयोग करना लाभदायक होता है।
वृद्धि (ऐगग्रेवेशन) :-
आंखों को चलाने से, गर्म कमरे के अन्दर, लेटकर उठने या बैठने से रोग के लक्षणों में वृद्धि होती है।
शमन (एमेलिओरेशन) :-
गर्मी से, गर्म पानी से नहाने या पानी से, आक्रान्त स्थान को कसकर बांधने से, हाथ-पांव को तानकर फैलाने से, चलने फिरने से, करवट बदलने से रोग के लक्षण नष्ट होने लगते हैं।
सम्बन्ध (रिलेशन) :-
कार्बो-वेज, का्र्बोल-ऐसिड, ओपि, सोरि, रस-टाक्स, सिकेल, वेरेट्र तथा आर्स औषधियों के कुछ गुणों की तुलना पाइरोजीनियम औषधि से कर सकते हैं।
मात्रा (डोज) :-
पाइरोजीनियम औषधि की 6 से 30 शक्ति तक और उच्चतर शक्तियों का प्रयोग रोग के लक्षणों को ठीक करने के लिए करना चाहिए। इस औषधि का बार-बार दोहराना नहीं चाहिए।
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