मैग्नेशिया फास्फोरिका (Magnesia Phosphorica)
परिचय-
मैग्नेशिया फास्फोरिका औषधि का उपयोग नसों के हर प्रकार के दर्द को ठीक करने के लिए लाभकारी है। शरीर के दाहिनी भाग में इस औषधि का असर बहुत अधिक लाभदायक है, लेकिन इसका असर सिर्फ दाहिने तरफ ही नहीं बल्कि शरीर के किसी भी भाग पर नसों के दर्द होने पर इस औषधि का आश्चर्यजनक फल मिलता है। इस औषधि का उपयोग उन रोगियों पर विशेष लाभकारी है जिन रोगी के शरीर में दर्द इस कदर तेज होता है जैसे टीस तथा सुई की चुभन होती है, ऐसा महसूस होता है कि दर्द वाले स्थान को काटा जा रहा है, दर्द रोगी को बेचैन कर देता है। कभी-कभी तो दर्द अचानक ही उठता है और बिजली की करंट की तरह पूरे शरीर में फैल जाता है और कभी तो दर्द तुरन्त ही बंद हो जाता है, दर्द का असर एक स्थान से दूसरे स्थान पर चला जाता है, पेट तथा कोख में तेज ऐंठन और मरोड़ होती है। छाती, कान, सिर मुंह, डिम्भाशय (ओवरी), सायेटिक नस अर्थात कूल्हे या कमर का गठिया रोग। इस प्रकार के रोगों को ठीक करने के लिए मैग्नेशिया फास्फोरिका औषधि का उपयोग करना चाहिए।
मूत्र नली में कैथिटर चलाने के बाद नसों में उत्तेजना अधिक हो जाती है जिसके कारण रात के समय में बिस्तर पर अपने आप पेशाब हो जाने पर मैग्नेशिया फास्फोरिका औषधि का उपयोग करना चाहिए।
यदि किसी रोगी को बेहोशी की समस्या हो तथा इसके साथ ही शरीर में तनाव तथा पेट में मरोड़ हो, नाड़ियों में दर्द हो तथा इसके साथ ही शरीर के कई अंगों में ऐंठन, तनाव तथा दर्द हो तो इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए मैग्नेशिया फास्फोरिका औषधि का उपयोग लाभदायक है।
मैग्नेशिया फास्फोरिका औषधि निम्नलिखित लक्षणों के रोगियों के रोग को ठीक करने में उपयोगी है-
वायुशूल (पेट में वायु बनने) से सम्बन्धित लक्षण :- पेट में हवा भर जाने के कारण या किसी भी कारण से पेट में दर्द हो रहा हो तथा जब रोगी पेट में सिकाई करता है या टांगों को पेट की ओर सिकोड़ लेता है तो उसे कुछ आराम मिलता है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए मैग्नेशिया फास्फोरिका औषधि उपयोगी लाभदायक है। ऐसे रोगी में और भी कई प्रकार के लक्षण होते हैं जो इस प्रकार हैं-रोगी कपड़े उतारना, हाथ-पैर धोना, खेलना-कूदना तथा ठंडी हवा पसन्द नहीं करता, दर्द के स्थान पर छू जाने से दर्द बढ़ जाने के भय से किसी को भी अपने दर्द वाले स्थान को छूने नहीं देता है।
सिर में दर्द से सम्बन्धित लक्षण :-मानसिक परिश्रम करने और अधिक पढ़ने के कारण सिर में दर्द होने लगता है तो इस प्रकार के दर्द को दूर करने के लिए मैग्नेशिया फास्फोरिका औषधि का उपयोग करना चाहिए जिसके फलस्वरूप रोग ठीक हो जाता है। इस प्रकार के दर्द से पीड़ित रोगी में और भी लक्षण होते हैं जो इस प्रकार हैं- दर्द का असर सिर के ऊपर की ओर फैलता है, दोपहर से पहले 10 और 11 बजे के अन्दर या शाम के 4 से 5 बजे के अन्दर दर्द में वृद्धि होती है, जब रोगी के सिर पर दबाव देते हैं या सिकाई करते हैं तो उसे दर्द से कुछ आराम मिलता है।
मन से सम्बन्धित लक्षण :-शरीर के कई अंगों में दर्द के कारण रोगी सोचने में असमर्थ रहता है तथा भूख भी नहीं लगती है। ऐसे लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए मैग्नेशिया फास्फोरिका औषधि का उपयोग करना चाहिए।
दांत का दर्द (टूथेक) से सम्बन्धित लक्षण :- दांत का दर्द अधिक परेशान करता है, दांत के दर्द के कारण रोगी की हालत पागलों की तरह हो जाती है, किसी भी तरह से दर्द से रोगी को चैन नहीं मिलता है, दर्द का असर एक स्थान से दूसरे स्थान को चला जाता है, खाने, पीने तथा ठंडी चीजों के इस्तेमाल करने से दांत में दर्द बढ़ जाता है, लेकिन जब दांत के दर्द वाले भाग में सिंकाई करते हैं तो कुछ आराम मिलता है। इस प्रकार के लक्षणों में से यदि कोई भी लक्षण किसी व्यक्ति को हो गया है तो उसके रोग को ठीक करने के लिए मैग्नेशिया फास्फोरिका औषधि का प्रयोग करना चाहिए जिसके फलस्वरूप रोग ठीक हो जाता है।
कान में दर्द से सम्बन्धित लक्षण :- कान में दर्द हो तथा दर्द का असर दायें कान के पीछे हो, ठंडी हवा लगने से दर्द कम हो और चेहरे तथा गर्दन को गर्म पानी से धोने से दर्द बढ़ रहा हो तो इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए मैग्नेशिया फास्फोरिका औषधि का उपयोग लाभकारी है।
चेहरे से सम्बन्धित लक्षण :- दांत में दर्द होने के साथ ही चेहरे, गाल तथा गर्दन में सूजन हो तथा जीभ में सूजन हो तो इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए मैग्नेशिया फास्फोरिका औषधि का उपयोग करना चाहिए।
गले से सम्बन्धित लक्षण :- गले में दर्द तथा अकड़न हो, विशेषकर गले के दायें भाग में, गले में सूजन हो और सारे शरीर में दर्द हो तो इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए मैग्नेशिया फास्फोरिका औषधि का उपयोग करना फायदेमन्द होता है।
आमाशय से सम्बन्धित लक्षण :- रोगी को हिचकी आने के साथ ही रात तथा दिन में उबकाई आ रही हो तथा इसके साथ ही आमाशय में दर्द हो तो ऐसे रोगी के रोग को ठीक करने के लिए मैग्नेशिया फास्फोरिका औषधि का उपयोग फायदेमन्द है।
श्वास संस्थान से सम्बन्धित लक्षण :- रोगी के छाती में दर्द हो रहा हो तथा इसके साथ ही सूखी खांसी हो गई हो तथा लेटने पर परेशानी कम हो या काली खांसी हो या गला बैठ गया हो तथा स्वरयंत्र में दर्द हो रहा हो या अन्त:पर्शुकाओं की स्नायु में दर्द हो। इस प्रकार के लक्षणों में से यदि कोई भी लक्षण किसी व्यक्ति को हो गया है तो उसके रोग को ठीक करने के लिए मैग्नेशिया फास्फोरिका औषधि का प्रयोग करना चाहिए।
हृदय से सम्बन्धित लक्षण:- हृदय में दर्द होना, नाड़ियों का ठीक प्रकार से न धड़कना, हृदय पिण्ड के चारों ओर सिकुड़न के साथ दर्द होना। ऐसे लक्षणों को ठीक करने के लिए मैग्नेशिया फास्फोरिका औषधि का उपयोग करना लाभदायक होता है।
बुखार से सम्बन्धित लक्षण:- भोजन करने के बाद बुखार हो जाता हो या शाम के समय में सर्दी लगकर बुखार हो जाता हो और रोगी को ऐसा महसूस हो रहा हो कि पीठ के ऊपर से नीचे की ओर ठंडी लहरे चल रही हैं तथा इसके साथ ही कंपकंपी हो और इसके बाद सांस लेने में रुकावट हो रही हो तो ऐसे लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए मैग्नेशिया फास्फोरिका औषधि का उपयोग करने से लाभ मिलता है।
मासिकधर्म से सम्बन्धित लक्षण:- मासिकधर्म शुरु होने के कुछ दिन पहले ही पेट के नीचे के भाग में दर्द होने लगता है, नाभि के पास तेज दर्द होता है और जब मासिकधर्म शुरु हो जाता है तो दर्द और भी तेज बढ़ जाता है, इसके साथ ही दाहिनी तरफ़ डिम्बाशय (ओवरी) और गर्भाशय के ऊपरी की झिल्ली में बिजली की तरह टीस मारता हुआ दर्द होता है, जब रोगी स्त्री दर्द वाले भाग पर सिकाई करती है तो उसे कुछ आराम मिलता है या टांगों को आगे की ओर सिकोड़ लेने से आराम मिलता है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित स्त्री रोगी के रोग को ठीक करने के लिए मैग्नेशिया फास्फोरिका औषधि का प्रयोग करना चाहिए जिसके फलस्वरूप रोग ठीक हो जाता है।
दांत निकलते समय ऐंठन (स्पेसम ड्युरिंग डेंटिनेशन) से सम्बन्धित लक्षण :- जब बच्चे में दांत निकलता है तो उस समय यदि उस बच्चे में बुखार न रहे और हाथ पांव ऐंठने लगे तो बच्चे के इस तरह की समस्या को दूर करने के लिए मैग्नेशिया फास्फोरिका औषधि का प्रयोग करना चाहिए जिसके फलस्वरूप बच्चे का यह रोग ठीक हो जाता है। यदि इस लक्षण के रहने के साथ ही बच्चे के सिर और बदन गर्म रहे और बुखार रहे तो उसका उपचार करने के लिए बेलाडोना औषधि उपयोगी होती है।
स्त्री रोग से सम्बन्धित लक्षण :- गर्भावस्था के समय में स्त्रियों की उंगुलियों में ऐंठन होने पर मैग्नेशिया फास्फोरिका औषधि का प्रयोग करने से उंगुलियों की ऐंठन ठीक हो जाती है।
आक्षेप से सम्बन्धित लक्षण :- रोगी को यदि बेहोशी की समस्या हो तथा बुखार न हो, शरीर के कई भागों में दर्द हो, कुकर खांसी हो तथा तलुवों में ऐंठन हो तो ऐसे लक्षणों को ठीक करने के लिए मैग्नेशिया फास्फोरिका औषधि उपयोग लाभदायक है।
सम्बन्ध (रिलेशन):- लैक-कैन, कालो और पल्स औषधियों के साथ मैग्नेशिया फास्फोरिका औषधि की तुलना कर सकते हैं।
वृद्धि (ऐगग्रेवेशन) :-
ठण्डे पानी से नहाने, हाथ-पैर धोने तथा ठंडी हवा से रोग के लक्षणों में वृद्धि होती है।
शमन (एमेलिओरेशन) :-
पैरों को सिकोड़ लेने से, रोग ग्रस्त भाग पर सिकाई करने से या दबाव देने से रोग के लक्षण नष्ट होने लगते हैं।
मात्रा (डोज) :-
मैग्नेशिया फास्फोरिका औषधि की 1 से 12 शक्ति का प्रयोग रोग के लक्षणों को ठीक करने के लिए करना चाहिए। उच्चतम शक्तियां का प्रयोग भी लाभदायक होता है।
नोट :-
यदि रोगी के शरीर के किसी भाग में जलन के साथ दर्द हो और उस स्थान पर गर्मी करने से दर्द कम हो तो आर्सेनिक औषधि का उपयोग लाभदायक होता है तथा बाकी सभी प्रकार के दर्दो में जब जलन के साथ दर्द न हो, लेकिन गर्मी पहुंचाने से घटता हो तो मैग्नेशिया फास्फोरिका औषधि का उपयोग लाभदायक होता है।
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