परिचय-
एस्पिडोस्पर्मा औषधि का प्रभाव रोगों को ठीक करने में डिजिटैलिस औषधि के समान है। यह औषधि श्वास नलियों के केन्द्रों को उत्तेजित करके उसकी रुकावट को स्थाई रूप से दूर कर देती है जिसके कारण खून का आवासीकरण (ऑक्सीडेशन) रुक जाता है। इस प्रकार से ऑक्सीकरण में वृद्धि करती है तथा कार्बोनिक एसिड को बाहर निकाल फेकती है। यह फेफड़ों की संकीर्णता (पुलमोनरी स्टेनोसीस), फुफ्फुस धमनी की घनास्त्रता (थ्रोम्बोसीस) को बनाये रखती है।
एस्पिडोस्पर्मा औषधि के प्रभाव से खून में यूरिया बढ़ जाती है जिसके कारण श्वास से संबन्धित अनेक रोग, दमा रोग ठीक हो जाता है। यह श्वास केन्द्रों को उत्तेजित करती है और रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है।
अधिक परिश्रम का कार्य करने पर सांस फूलने लगती है उस समय एस्पिडोस्पर्मा औषधि का प्रयोग करने से बहुत अधिक लाभ मिलता है और रोगी को आराम मिलता है, हृदय रोगों के कारण होने वाला दमा रोग को यह ठीक कर देता है।
सम्बन्ध :-
कोका, आर्सेनिक, कैटाल्पा, काफिया औषधि से एस्पिडोस्पर्मा औषधि की तुलना कर सकते हैं।
मात्रा :-
एस्पिडोस्पर्मा औषधि की पहली शक्ति का विचूर्ण या मूलार्क अथवा ऐस्पिडोस्पर्मिन हाइड्रोक्लोराइड, शक्ति के विचूर्ण का एक ग्रेन का प्रयोग रोग के लक्षणों को ठीक करने के लिए करना चाहिए। इस प्रयोग एक-एक घण्टे के बाद करना चाहिए।
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