होम्‍योपैथी चिकित्‍सा के जन्‍मदाता सैमुएल हैनीमेन है

होम्योपैथी एक विज्ञान का कला चिकित्सा पद्धति है। होम्योपैथिक दवाइयाँ किसी भी स्थिति या बीमारी के इलाज के लिए प्रभावी हैं; बड़े पैमाने पर किए गए अध्ययनों में होमियोपैथी को प्लेसीबो से अधिक प्रभावी पाया गया है। होम्‍योपैथी चिकित्‍सा के जन्‍मदाता सैमुएल हैनीमेन है।

भारत होम्योपैथिक चिकित्सा में वर्ल्ड लीडर हैं।

होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति की शुरुआत 1796 में सैमुअल हैनीमैन द्वारा जर्मनी से हुई। आज यह अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी में काफी मशहूर है, लेकिन भारत इसमें वर्ल्ड लीडर बना हुआ है। यहां होम्योपथी डॉक्टर की संख्या ज्यादा है तो होम्योपथी पर भरोसा करने वाले लोग भी ज्यादा हैं।

होम्योपैथी मर्ज को समझ कर उसकी जड़ को खत्म करती है।

होम्योपैथी मर्ज को समझ कर उसकी जड़ को खत्म करती है। होम्योपैथी में किसी भी रोग के उपचार के बाद भी यदि मरीज ठीक नहीं होता है तो इसकी वजह रोग का मुख्य कारण सामने न आना भी हो सकता है।

होम्योपथी दवा मीठी गोली में भिगोकर देते हैं

होम्योपथी हमेशा से ही मिनिमम डोज के सिद्धांत पर काम करती है। इसमें कोशिश की जाती है कि दवा कम से कम दी जाए। इसलिए ज्यादातर डॉक्टर दवा को मीठी गोली में भिगोकर देते हैं क्योंकि सीधे लिक्विड देने पर मुंह में इसकी मात्रा ज्यादा भी चली जाती है। इससे सही इलाज में रुकावट पड़ती है।

डॉक्टरी परामर्श से इसका सेवन किसी भी दूसरे मेडिसिन के साथ कर सकते हैं।

होम्योपैथी की सबसे खास बात है कि आप डॉक्टरी परामर्श से इसका सेवन किसी भी दूसरे मेडिसिन के साथ कर सकते हैं। इससे किसी भी तरह का कोई साइड इफेक्ट होने का खतरा नहीं होता।

सोलेनम नाइग्रम (काला धतूरा) Solanum Nigrum (Black Nightshade)

 सोलेनम नाइग्रम (काला धतूरा) Solanum Nigrum (Black Nightshade) 

परिचय-

सेलेनम नाइग्रम औषधि का सिर और आंखों पर बहुत अच्छा असर पड़ता है। विभिन्न रोगों के लक्षणों के आधार पर सोलेनम नाइग्रम औषधि का उपयोग- 

सिर से सम्बंधित लक्षण- रोगी को सिर के घूमने के कारण चक्कर से आना, रोगी को सिर में बहुत तेज दर्द होना, रोगी का सिर में दर्द होने के कारण बहुत तेज रोना, रोगी का अंधेरे में जाते ही डर जाना, रोगी के सिर में खून जमा हो जाने के कारण दर्द होना आदि लक्षणों में रोगी को सोलेनम नाइग्रम औषधि देना लाभकारी रहता है। 

नाक से सम्बंधित लक्षण- रोगी को बहुत तेज सर्दी लग जाना, रोगी के दाएं तरफ के नथुने से बहुत ज्यादा मात्रा में पानी जैसा स्राव आना, रोगी की नाक का बाईं तरफ का नथुना बंद हो जाने के साथ ही रोगी को ठण्ड सी महसूस होना जैसे लक्षणों में सोलेनम नाइग्रम औषधि का सेवन उपयोगी रहता है।

आंखों से सम्बंधित लक्षण- रोगी की दोनों आंखों के ऊपर वाले भाग में दर्द होना, आंखों की पुतलियों का बहुत ज्यादा फैल जाना या सिकुड़ जाना, आंखों की रोशनी का कम होना, आंखों के सामने हर समय धब्बे से घूमते हुए नज़र आना जैसे लक्षणों में रोगी को सोलेनम नाइग्रम औषधि देना लाभकारी रहता है।

सांस से सम्बंधित लक्षण- रोगी को अपनी छाती सिकुड़ती हुई सी महसूस होने के साथ ही सांस लेने में परेशानी होना, रोगी को खांसी होने के साथ-साथ गले में सुरसुराहट सी होना, रोगी को खांसी के साथ गाढ़ा, पीले रंग का बलगम आना, रोगी की छाती में बाईं तरफ दर्द जो छूने पर और तेज हो जाता है। इस तरह के लक्षणों में रोगी को सोलेनम नाइग्रम औषधि देने से लाभ मिलता है।

बुखार से सम्बंधित लक्षण- रोगी को अचानक बहुत तेज ठण्ड लगना और कभी बहुत तेज गर्मी लगना, आरक्त ज्वर में रोगी के शरीर पर फुंसियां सी निकलना आदि लक्षणों में रोगी को सोलेनम नाइग्रम औषधि देने से आराम मिलता है। 

तुलना-

सोलेनम नाइग्रम औषधि की तुलना बेला, सोलेनम, कैरोलीनेन्स, सोलेनम मैमोसम, सोलेनम आलिरेशियम, सोलेनम ट्यूबरोसम, सोलेनम बेसिकेरियम, सोलेनिनम असेटिकम, सोलेन-स्यूडोकैप्स, सोलेन-ट्यूबरोसा-ईग्रोटैन्स, सोलेनम ट्येबरोसम से की जा सकती है।

मात्रा-

रोगी को सोलेनम नाइग्रम औषधि की 2x से 30 शक्ति तक देने से रोगी कुछ ही दिनों में स्वस्थ हो जाता है। 


सैबाडिल्ला (सैबाडिल्ला सीड-असाग्रैइया आफिसिनैलिस) Sabadilla (Cabadilla Seed-Asagraea officinalis)

 सैबाडिल्ला (सैबाडिल्ला सीड-असाग्रैइया आफिसिनैलिस) Sabadilla (Cabadilla Seed-Asagraea officinalis) 

परिचय-

शरीर में छोटे-छोटे चूने, फीते की तरह के कीड़े और हर तरह के कीड़ों को समाप्त करने के लिए सैबाडिल्ला एक बहुत ही लाभकारी औषधि मानी जाती है। कीड़ों से होने वाले बहुत से रोगों को दूर करने के लिए इस औषधि का प्रयोग किया जाता है। बच्चों के पेट में होने वाले कीड़ों को समाप्त करने के लिए भी इस औषधि को बहुत असरकारक माना जाता है। विभिन्न रोगों के लक्षणों के आधार पर सैबाडिल्ला औषधि का उपयोग- 

मन से सम्बंधित लक्षण- रोगी को हर समय एक तरह का डर सा लगा रहता है। रोगी बैठे-बैठे ही चौंक पड़ता है। रोगी स्त्री को अपने आप ही मन में अजीब-अजीब से विचार पैदा हो जाते हैं जैसे कि वह अपने आप को रोगी समझने लगती है, उसे लगता है कि वह मां बनने वाली है, उसे कैंसर का रोग हो गया है। रोगी रुक-रुककर आने वाले बुखार के दौरान बहुत तेजी से चीखता-चिल्लाता है। इन सारे मानसिक रोगों के लक्षणों के आधार पर अगर रोगी को सैबाडिल्ला औषधि देने से वो कुछ ही दिन में ठीक हो जाता है।

सिर से सम्बंधित लक्षण-रोगी को अपना सिर घूमने के साथ-साथ आसपास की सारी चीजें भी घूमती हुई सी नज़र आती है। रोगी की आंखों के सामने अंधेरा सा छाने लगता है। किसी भी प्रकार की गंध आते ही रोगी के सिर में दर्द चालू हो जाता है। किसी भी बात को सोचने से रोगी को सिर में दर्द और नींद आने लगती है। रोगी की पलकें लाल होने के साथ-साथ उनमें जलन भी होने लगता है, आंखों से हर समय आंसू से निकलते रहते हैं, किसी की कही गई बात साफ तौर पर सुनाई नहीं दे पाती। इस तरह के सिर के रोगों के लक्षणों में रोगी को सैबाडिल्ला औषधि देने से लाभ होता है।

नाक से सम्बंधित लक्षण-रोगी को सर्दी-जुकाम लगने के कारण बार-बार छींके आना और नाक से बहुत ज्यादा मात्रा में स्राव का होना, आंखों के लाल होने के साथ-साथ माथे में बहुत तेजी से दर्द का होना और आंखों से पानी का आना, रोगी की नाक से बहुत ज्यादा मात्रा में पानी जैसा पतला सा स्राव आते रहना जैंसे लक्षणों में सैबाडिल्ला औषधि का प्रयोग लाभदायक सिद्ध होता है।

गले से सम्बंधित लक्षण-गले में बहुत तेजी से दर्द जो बाईं तरफ से शुरू होता है। गले से बहुत ज्यादा मात्रा में ठोस सा बलगम आना। रोगी अगर गर्म भोजन करता है और गर्म पेय पदार्थ पीता है तो उसे आराम आता है। रोगी को अपना गला और गलकोश सूखे हुए से महसूस होते हैं। रोगी की गले में बहुत तेज जलन जो ठण्डी हवा से ज्यादा हो जाती है। जीभ ऐसी महसूस होती है जैसे कि उसे किसी ने जला दिया हो। इन लक्षणों के किसी रोगी में मिल जाने पर उसे सैबाडिल्ला औषधि देने से वह कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

आमाशय से सम्बंधित लक्षण- रोगी को प्यास बिल्कुल न लगना, तेज भोजन को देखते ही जी का खराब हो जाना, सूखी खांसी होना, सांस लेने में परेशानी होने के साथ ही रोगी के आमाशय में बहुत तेज दर्द का उठना, मीठी चीजों और आटे से बनी चीजों को रोगी को जितना भी खिला दो उसकी भूख शांत नहीं होती। मुंह में पानी भर जाना, मुंह से बहुत ज्यादा लार का गिरना, मुंह का स्वाद मीठा सा होना। रोगी को अपने आमाशय के अंदर बहुत ज्यादा ठण्डक और खालीपन सा लगना। इन सारे लक्षणों के रोगी में पाए जाने पर उसे सैबाडिल्ला औषधि देनी चाहिए।

शरीर के बाहरी अंग से सम्बंधित लक्षण- रोगी के पैरों की उंगलियों के नीचे की चमड़ी का फट जाना, पैरों की उंगलियों के नाखूनों के नीचे जलन सी होना आदि लक्षणों के आधार पर रोगी को सैबाडिल्ला औषधि देने से लाभ मिलता है।

स्त्री रोगों से सम्बंधित लक्षण- स्त्री को मासिकस्राव समय से बहुत बाद में आना आदि लक्षणों में रोगी को सैबाडिल्ला औषधि का प्रयोग कराना लाभकारी रहता है।

बुखार से सम्बंधित लक्षण-रोगी को बुखार आने के लक्षणों में सबसे पहले शरीर में नीचे से ऊपर की तरफ ठण्ड पहुंचती रहती है, रोगी के सिर और चेहरे में गर्मी सी बढ़ जाती है। रोगी के हाथ-पैर बहुत ज्यादा ठण्डे हो जाते है। बुखार होने पर रोगी के आंखों से पानी आता रहता है। बुखार के दौरान रोगी को बिल्कुल प्यास नही लगती। इन सारे लक्षणों के आधार पर रोगी को सैबाडिल्ला औषधि देने से लाभ मिलता है।

वृद्धि- 

दोपहर से पहले, रात या दिन में 10 या 12 बजे के बीच में, ठण्ड से, आराम करते समय, ठण्डे पीने वाले पदार्थो से, फूलों या दूसरे किसी चीज की खुशबू से रोग बढ़ जाता है।

शमन-

किसी तरह की हरकत करने से, निगलने से, गर्म होने पर, गर्म भोजन को खाने से रोग कम हो जाता है।

अनुपूरक-

सीपिया।

प्रतिविष-

कोन, लैके, लायको, सल्फ औषधि का उपयोग सैबाडिल्ला औषधि के हानिकारक प्रभाव को नष्ट करने के लिए किया जाता है।

तुलना-

सैबाडिल्ला औषधि की तुलना वेरेट्रिना, लैनोलिन, काल्चिक, नक्स, अरुण्डों, पोलैटिन फ्लियम प्रैटेन्स-टिमोथी, कुमैरीनम से की जा सकती है।

मात्रा-

रोगी को सैबाडिल्ला औषधि की 3 से 30 शक्ति तक देनी चाहिए।


सिंकोना आफिसिनैलिस चायना Cinchona officinalis

 सिंकोना आफिसिनैलिस चायना Cinchona officinalis

परिचय-

सिंकोना आफिसिनैलिस चायना औषधि वैसे तो बहुत से रोगों के लक्षणों में लाभकारी रहती है फिर भी 

शरीर के विभिन्न अंगों से खून निकलने के कारण आने वाली कमजोरी को दूर करने में इस औषधि को बहुत असरकारक माना जाता है। विभिन्न रोगों के लक्षणों के आधार पर सिंकोना आफिसिनैलिस चायना औषधि का उपयोग-

आमाशय से सम्बंधित लक्षण- रोगी का पेट फूल जाना जैसे कि रोगी ने बहुत ज्यादा भोजन खाया हो, डकार आने और मलद्वार से गैस निकलने पर भी पेट का कम न होना, रोगी को बिना दर्द के पीले या भूरे रंग के दस्त आना जैसे लक्षणों में सिंकोना आफिसिनैलिस चायना औषधि का उपयोग लाभकारी रहता है।

चेहरे से सम्बंधित लक्षण- रोगी के सुबह जागने पर चेहरा बिल्कुल मुरझाया हुआ सा लगता है, आंखें अंदर की ओर धंस जाती है, आंखों के चारों ओर काले-नीले से घेरे पड़ जाते हैं, चेहरा बिल्कुल पीला पड़ जाता है जैसे कि रोगी ने संभोगक्रिया बहुत ज्यादा की हो आदि लक्षणों में सिंकोना आफिसिनैलिस चायना औषधि का उपयोग बेहतर रहता है।

खून से सम्बंधित लक्षण- रोगी के शरीर के सभी अंगों से खून का निकलना, खून का काला या निकलने के बाद काला पड़ जाना, रोगी के कानों में ऐसी आवाज गूंजना जैसे कि मंदिर की घंटियां बज रही हों, रोगी को अपने पूरे शरीर में बहुत ज्यादा ठण्डक महसूस होने के साथ शरीर का अकड़ा हुआ सा लगना इसके साथ ही तेजी से कंपकंपी छा जाना जैसे लक्षणों में रोगी को सिंकोना आफिसिनैलिस चायना औषधि का सेवन कराना अच्छा रहता है।

पसीने से सम्बंधित लक्षण- रोगी जितना भी पानी पी लें उसे फिर भी प्यास लगते रहना इसके साथ ही बहुत ज्यादा पसीना आना, अगर रोगी रात को सोते समय कोई चादर आदि ओढ़ लेता है तो उसका पूरा शरीर पसीने में भीग जाता है। इस तरह के लक्षणों में रोगी को सिंकोना आफिसिनैलिस चायना देने से लाभ मिलता है।

जिगर से सम्बंधित लक्षण- रोगी की दाईं तरफ की कोंख में दर्द होना, जिगर का बढ़ जाना जिसको छूते ही रोगी को बहुत तेज दर्द होता है, रोगी की त्वचा और आंखों के अंदर का सफेद भाग पीला हो जाना, पेशाब का रंग मैला सा आना, मल का रंग भी पहले की अपेक्षा फीका पड़ जाना आदि लक्षणों में सिंकोना आफिसिनैलिस चायना औषधि लाभ करती है। 

मात्रा-

रोगी को सिंकोना आफिसिनैलिस चायना औषधि की 200 शक्ति देने से रोगी को बहुत आराम मिलता है।


सैकरम आफीसिनैलि-सुक्रोज (इक्षु-शर्करा) Saccharum Officinale-Sucrose (Cane-Sugar)

 सैकरम आफीसिनैलि-सुक्रोज (इक्षु-शर्करा) Saccharum Officinale-Sucrose (Cane-Sugar) 

परिचय-

एक विद्वान व्यक्ति के अनुसार स्त्रियों और बच्चों को होने वाले ज्यादातर रोग चीनी के सेवन से पैदा होते हैं। सैकरम आफीसिनैलि-सुक्रोज औषधि शरीर में जहर को समाप्त करती है, रोगों को बढ़ने से रोकती है। फाइब्रिन पर इस औषधि की विलायक क्रिया होती है तथा ये तेज परासरणी बदलावों द्वारा स्रावों को उत्तेजित करती है जिसके फलस्वरूप सीरम से जख्म अंदर से बाहर की ओर साफ होते हैं और जल्दी ही ठीक हो जाते हैं।

सैकरम आफीसिनैलि-सुक्रोज औषधि को दिल की मांसपेशियों का पोषक और ताकत बढ़ाने वाला समझा जाता है और इसी कारण से ये औषधि दिल के यंत्र की खून की नलियों के बहुत से रोगों में बहुत लाभकारी है।

कनीनिका की अपारदर्शिता, आंखों की रोशनी कम होना, मलद्वार में खुजली होना, ठण्डा बलगम आना, हत्पेशियों का अपजनन (माइकारडियल डिगेनरेशन) पैरों में पानी भर जाना, रोगी को हर सातवें दिन सिर में दर्द हो जाना आदि में भी सैकरम आफीसिनैलि-सुक्रोज औषधि लाभ करती है।

तुलना-

सैकरम आफीसिनैलि-सुक्रोज औषधि की तुलना सैकरम लैक्टिस से की जा सकती है।

मात्रा-

रोगी को 30 शक्ति और ऊंची शक्तियां देने से रोगी कुछ ही दिनों में स्वस्थ हो जाता है।


सैकरम आफीसिनैलि-सुक्रोज (इक्षु-शर्करा) Saccharum Officinale-Sucrose (Cane-Sugar)इक्षु शर्करा (Cane-Sugar)-सैक-आफ

 सैकरम आफीसिनैलि-सुक्रोज (इक्षु-शर्करा) Saccharum Officinale-Sucrose (Cane-Sugar)इक्षु शर्करा (Cane-Sugar)-सैक-आफ

परिचय-

एक विद्वान व्यक्ति के अनुसार स्त्रियों और बच्चों को होने वाले ज्यादातर रोग चीनी के सेवन से पैदा होते हैं। सैकरम आफीसिनैलि-सुक्रोज औषधि शरीर में जहर को समाप्त करती है, रोगों को बढ़ने से रोकती है। फाइब्रिन पर इस औषधि की विलायक क्रिया होती है तथा ये तेज परासरणी बदलावों द्वारा स्रावों को उत्तेजित करती है जिसके फलस्वरूप सीरम से जख्म अंदर से बाहर की ओर साफ होते हैं और जल्दी ही ठीक हो जाते हैं।

सैकरम आफीसिनैलि-सुक्रोज औषधि को दिल की मांसपेशियों का पोषक और ताकत बढ़ाने वाला समझा जाता है और इसी कारण से ये औषधि दिल के यंत्र की खून की नलियों के बहुत से रोगों में बहुत लाभकारी है।

कनीनिका की अपारदर्शिता, आंखों की रोशनी कम होना, मलद्वार में खुजली होना, ठण्डा बलगम आना, हत्पेशियों का अपजनन (माइकारडियल डिगेनरेशन) पैरों में पानी भर जाना, रोगी को हर सातवें दिन सिर में दर्द सिर में दर्द हो जाना आदि में भी सैकरम आफीसिनैलि-सुक्रोज औषधि लाभ करती है।

तुलना-

सैकरम आफीसिनैलि-सुक्रोज औषधि की तुलना सैकरम लैक्टिस से की जा सकती है।

मात्रा-

रोगी को 30 शक्ति और ऊंची शक्तियां देने से रोगी कुछ ही दिनों में स्वस्थ हो जाता है।


सैबाइना(सैबाइन- सैबा) Sabina (Savine)

 सैबाइना(सैबाइन- सैबा) Sabina (Savine) 

परिचय-

सैबाइना औषधि का प्रयोग अनेक रोगों को ठीक करने के लिए किया जाता है लेकिन इस औषधि को स्त्री रोगों के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है। स्त्री रोगों में गर्भाशय में होने वाले रोगों में, डिम्बाशय के रोगों में, मासिकस्राव की परेशानियों में ये औषधि बहुत अच्छा और चमत्कारिक असर दिखाती है। विभिन्न रोगों के लक्षणों के आधार पर सैबाइना औषधि से होने वाले लाभ- 

मन से सम्बंधित लक्षण- रोगी को अगर किसी तरह का भी संगीत सुनाया जाता है तो रोगी को बहुत तेजी से गुस्सा आने लगता है या वह अपने ही बाल नोचने लगता है। इस तरह के मानसिक रोगों के लक्षणों में रोगी को सैबाइना औषधि देना बहुत ही लाभकारी साबित होता है।

सिर से सम्बंधित लक्षण- रोगी के सिर में बहुत तेजी से होने वाला दर्द जो अचानक शुरू हो जाता है और कुछ समय के बाद अपने आप ही कम होने लगता है। रोगी का सिर घूमने के कारण चक्कर आना। स्त्रियों में मासिकधर्म के रुक जाने के कारण होने वाला सिर का दर्द। रोगी के सिर और चेहरे की ओर खून का दौरा तेज होने के कारण सिर में दर्द होना। चेहरे की पेशियों में खिंचाव के साथ होने वाला दर्द। किसी चीज को चबाते समय दांतों में दर्द का होना जैसे लक्षणों में रोगी को सैबाइना औषधि देना बहुत ही उपयोगी साबित होता है।

आमाशय से सम्बंधित लक्षण- रोगी के दिल में जलन सी महसूस होना। मुंह का स्वाद बिल्कुल कड़वा होना। रोगी का मन हरदम खट्टे पदार्थों का सेवन करने का करता है। पेट के अंदर से लेकर पीठ के आर-पार तक किसी नुकीली चीज के द्वारा काट दिये जाने जैसा दर्द होनाइस तरह के लक्षणों में अगर रोगी को सैबाइना औषधि देना बहुत लाभकारी साबित होता है।

पेट से सम्बंधित लक्षण- नाभि के निचले भाग के सिकुड़ जाने के कारण पैदा होने वाला दर्द, पेट में होने वाला दर्द जो ज्यादातर नीचे की तरफ होता है, स्त्रियों की कोख में गैस के कारण किसी तरह का फुलाव आ जाना जैसे लक्षणों में अगर रोगी को सैबाइना औषधि दी जाए तो उसके लिए बहुत ही उपयोगी साबित होता है।

मलान्त्र से सम्बंधित लक्षण- रोगी को अपने मलान्त्र में पूर्णता महसूस होना, रोगी को कब्ज का रोग होना, पीठ से लेकर जांघ की हड्डी तक दर्द का होना, खूनी बवासीर में खून का बहुत ज्यादा मात्रा में आना जैसे लक्षणों में रोगी को सैबाइना औषधि देनी चाहिए।

मूत्र (पेशाब) से सम्बंधित लक्षण- रोगी को गुर्दों के भाग में जलन और कंपन सी महसूस होना, पेशाब का बहुत तेजी से और खून के साथ आना, पेशाब की नली में जलन होने के साथ पूरे शरीर में गर्मी महसूस होना, पेशाब के रास्ते में सूजन आना जैसे लक्षणों में अगर रोगी को सैबाइना औषधि दी जाए तो ये उसके लिए बहुत ही लाभकारी सिद्ध होती है।

पुरुष रोग से सम्बंधित लक्षण- पुरुष रोगी के जननेन्द्रियों में जलन के कारण सुजाक के साथ स्राव का आना, प्रमेह रोग के कारण मांस का बढ़ना, लिंग के आगे के भाग में जलन के साथ होने वाला दर्द, लिंग की चमड़ी में दर्द होना जिसे खोलते समय और भी परेशानी होती है, यौन उत्तेजना का तेज होना जैसे लक्षणों में अगर रोगी को सैबाइना औषधि दी जाए तो उसको बहुत लाभ होता है।

स्त्री रोग से सम्बंधित लक्षण- स्त्री का मासिकस्राव समय से पहले और बहुत ज्यादा मात्रा में आना, गर्भाशय में होने वाला दर्द जो जांघों तक फैल जाता है। स्त्री को ऐसा लगता है जैसे कि उसका गर्भस्राव होने वाला है। स्त्री की यौन उत्तेजना का तेज होना, मासिकस्राव आने के बाद स्त्री का प्रदर-स्राव (योनि मे से पानी का आना) शुरू हो जाना जिसमें कि स्त्री की खाल तक उतर जाती है। मासिकस्राव आने के दौरान बीच मे ही खून का आना और इसके साथ ही यौन उत्तेजना का बढ़ जाना। उन महिलाओं में बहुत ज्यादा मासिकस्राव आना जिन्हे तुरन्त ही गर्भस्राव हो जाता है। स्त्री का गर्भपात हो जाने के बाद डिम्बग्रंथियों और गर्भाशय में जलन होना, त्रिकास्थि से लेकर जांघ की हड्डी तक दर्द, योनि के रास्ते से होकर नीचे से ऊपर तक गोली के लगने जैसा दर्द होना, गर्भाशय की अतानता (एटोनी) जैसे लक्षणों में रोगी को सैबाइना औषधि देने से आराम आता है।

पीठ से सम्बंधित लक्षण- रोगी की त्रिकास्थि (रीढ़ की हड्डी के नीचे का भाग) से लेकर जांघ की हड्डी के बीच एक हड्डी से लेकर दूसरी हड्डी तक दर्द का होना। कमर में लकवा मार जाने जैसा दर्द का होना आदि लक्षणों के आधार पर रोगी को सैबाइना औषधि का सेवन कराने से लाभ मिलता है।

चर्म (त्वचा) से सम्बंधित लक्षण- रोगी की त्वचा पर अंजीरी मस्से होना इसके साथ ही त्वचा पर बहुत तेज खुजली और जलन होना, मांसाकुरों की बहुलता, त्वचा पर मस्से से निकलना, त्वचा पर काले-काले से छेद निकलना जैसे लक्षणों में रोगी को सैबाइना औषधि देने से लाभ मिलता है।

शरीर के बाहरीय अंगों से सम्बंधित लक्षण- जांघ के आगे के हिस्से में किसी चीज के द्वारा कुचले जाने जैसा दर्द होना, एड़ियों और पैरों की हडि्डयों में गोली के लगने जैसा दर्द का होना, जोड़ों में जलन के साथ पैदा होने वाला दर्द, गठिया रोग जो गर्म कमरे में ज्यादा पैदा होता है, जोड़ों में होने वाली गांठें आदि लक्षणों में अगर रोगी को सैबाइना औषधि का प्रयोग कराना बहुत ही उपयोगी साबित होता है।

पूरक-

थूजा।

प्रतिविष-

पल्सा औषधि का उपयोग सैबाइना औषधि के दोषों को दूर करने के लिए किया जाता है।

वृद्धि-

किसी तरह की हरकत करने से, गर्म कमरे में, गर्म हवा से, बच्चे को जन्म देने के बाद, संगीत से, गहरी सांस लेने से रोग बढ़ जाता है।

शमन-

ठण्डी हवा से, ताजी हवा से, सांस छोड़ने से और ठण्ड से रोग कम हो जाता है।

तुलना-

सैबाइना औषधि की तुलना कैल्क-कार्ब, क्रोक, मिलेफ, सिकेल और ट्रिल औषधियों के साथ की जा सकती है।

मात्रा-

रोगी को सैबाइना औषधि का मूलार्क या 3 से 30 शक्ति तक देनी चाहिए।