मैग्नीशिया कार्बोनिका (Magnesia carbonica)
परिचय-
रोगी का शरीर सुस्त सा रहता है, खुली हवा में रहने की इच्छा होती है, लेकिन हवा से परेशानी भी होती है, बुखार होने के साथ रोगी को चादर ओढ़ने का मन करता है, प्रतिदिन शाम के समय में रोगी को बुखार चढ़ता है और बुखार के एक्कीसवीं दिन कोई खास लक्षण उत्पन्न होना। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी जब गर्म चीजें तथा गर्म पानी का सेवन करता है तो उसे शरीर में गर्मी महसूस होती है और शरीर से पसीना आता है तथा शाम के समय में प्यास लगती है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए मैग्नीशिया कार्बोनिका औषधि का उपयोग करना चाहिए। यदि बच्चे के पूरे शरीर से खट्टी बदबू आ रही हो तथा उन्हें फोड़े-फुंसियों की शिकायत रहती हो तो ऐसे बच्चे का उपचार करने के लिए मैग्नीशिया कार्बोनिका औषधि का प्रयोग करना चाहिए जिसके फलस्वरूप रोग ठीक हो जाता है।
अधिक दुबली-पतली स्त्रियां जो जरायु (गर्भाशय के रोग) रोग से पीड़ित होती है, उन्हें मासिकधर्म के समय में और भी अधिक परेशानी होती है तथा इसके साथ ही शरीर के कई अंग सुन्न पड़ जाते हैं, मानसिक तनाव अधिक रहता है, स्त्री को अधिक शोरगुल माहौल अच्छा नहीं लगता है, नाड़ियां कमजोर हो जाती है, कब्ज की समस्या बनी रहती है, रोगी स्त्री कभी-कभी चौंक पड़ती है या ठण्डे मौसम या अत्यधिक दर्द महसूस करती है।
मैग्नीशिया कार्बोनिका औषधि निम्नलिखित लक्षणों के रोगियों के रोग को ठीक करने में उपयोगी है-
सिर से सम्बन्धित लक्षण :- रोगी जिस अंग का सहारा लेकर लेटता है, सिर के उसी भाग की ओर चुभन सी दर्द होती है, ऐसा महसूस होता है कि जैसे बाल उखाड़े जा रहे हो, मानसिक परेशानी भी अधिक हो जाती है, सिर में खुजली मचने लगती है और नमीदार मौसम में खुजली और भी तेज होने लगती है। खुजली रोगी को अक्सर दायें नेत्रकोटर के कोण के ऊपरी भाग में होता है तथा इस भाग में दर्द भी होता है, आंखों के सामने काले धब्बे पड़ जाते हैं। इस प्रकार के लक्षणों में से कोई भी लक्षण यदि रोगी को हो गया हो तो उसके रोग को ठीक करने के लिए मैग्नीशिया कार्बोनिका औषधि का उपयोग करना चाहिए।
कान से सम्बन्धित लक्षण :- रोगी की सुनने की शक्ति कम हो जाती है। रोगी बहरेपन के रोग से पीड़ित होता है तथा उसके सुनने की शक्ति में उतार-चढ़ाव होता रहता है, कान में सुन्नपन महसूस होता है, कान के बीच के भाग में सुजन आ जाती है तथा कान पर दबाव महसूस होता है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए मैग्नीशिया कार्बोनिका औषधि का प्रयोग करना फायदेमंद होता है।
चेहरे से सम्बन्धित लक्षण :- चेहरे के एक ओर फाड़ता हुआ दर्द महसूस होता है, रोगी जब शान्त रहता है तो उसे अधिक दर्द होता है, रोगी इधर-उधर टहलते रहने का बाध्य रहता है। रोगी स्त्री को गर्भकाल के समय में दान्त में दर्द हो रहा हो तथा ठण्ड के समय, रात के समय में रोग के लक्षणों में वृद्धि होती है, रोगी स्त्री ऐसा महसूस करती है कि दान्त लम्बे हो गए है,। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए मैग्नीशिया कार्बोनिका औषधि का उपयोग करना चाहिए तथा इन लक्षणों से पीड़ित रोगी के गले पर फोड़े तथा फुंसियां हो जाती है जिसके कारण रोग ग्रस्त भाग में भी दर्द होता है।
मुंह से सम्बन्धित लक्षण :- रात के समय में मुंह खुश्क रहता है तथा जीभ का स्वाद खट्टा हो जाता है, मुंह में छाले पड़ जाते हैं तथा जीभ से कभी-कभी खून भी निकलता है, गले में खोदने जैसा दर्द होता है, खंखारने पर बदबूदार मटर के रंग के टुकड़े निकलते हैं। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए मैग्नीशिया कार्बोनिका औषधि का प्रयोग करना लाभदायक होता है।
आमाशय से सम्बन्धित लक्षण :- रोगी को फल, खट्टे पदार्थ और शाक-सब्जियां खाने की इच्छा होती है, खट्टी डकारें और कड़वे जल की उल्टियां होती है तथा मांस खाने की इच्छा होती है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए मैग्नीशिया कार्बोनिका औषधि का उपयोग लाभदायक है।
पेट से सम्बन्धित लक्षण :- पेट में गड़गड़ाहट जैसी आवाजें होती है तथा गुदगुदी मचने लगती है तथा छाती की ओर खिंचाव होता है, कमर में अकड़न तथा चुटकी काट दिये जाने जैसा दर्द होता है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए मैग्नीशिया कार्बोनिका औषधि का उपयोग लाभकारी है।
मल से सम्बन्धित लक्षण :- मलत्याग करने से पहले रोगी को पेट में दर्द तथा मरोड़ होता है, मल हरा तथा मिट्टी की तरह और पानी जैसा होता है, कभी-कभी तो मल के साथ खून भी आने लगता है। स्तनपान करने वाले बच्चे को दूध हजम नहीं होता है तथा बच्चे के मल में अनपचा दूध निकलता है। रोगी के मल से खट्टी बदबू आती है, साथ ही पेट में मरोड़ होती है तथा रोगी को कब्ज की शिकायत भी रहती है। इस प्रकार के मल से सम्बन्धित लक्षण उत्पन्न होने पर रोगी के रोग को ठीक करने के लिए मैग्नीशिया कार्बोनिका औषधि का प्रयोग करना चाहिए।
स्त्री रोग से सम्बन्धित लक्षण :- स्त्री रोगी के मासिकधर्म शुरू होने के दिनों में गले में जलन होती है, स्राव होने से पहले जुकाम हो जाता है तथा नाक बंद हो जाता है, मासिकधर्म नियमित समय के बहुत देर बाद और थोड़ी मात्रा में होता है, स्राव गाढ़ा गहरे रंग का तरकोल जैसा कफ के समान होता है। स्त्री को स्राव केवल नींद में, रात को अधिक, लेटे रहने पर और चलते समय बंद हो जाता है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी स्त्री के रोग को ठीक करने के लिए मैग्नीशिया कार्बोनिका औषधि का प्रयोग करना उचित होता है।
श्वास संस्थान से सम्बन्धित लक्षण :- खांसी से पीड़ित रोगी के बलगम का स्वाद नमकीन हो तथा उसमें खून भी आ रहा हो तथा नाक में गुदगुदी मच रही हो, छाती में दबाव के साथ दर्द हो रहा हो तथा इसके साथ ही सांस लेने में परेशानी हो रही हो। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी जब चलने फिरने का कार्य करता है तो उसके छाती में और भी तेज दर्द होता है। ऐसे रोगी के रोग को ठीक करने के लिए मैग्नीशिया कार्बोनिका औषधि का उपयोग फायदेमंद है।
शरीर के बाहरी अंगों से सम्बन्धित लक्षण :- रोगी के कंधे में तेज दर्द होता है, बायें कंधे में इतना तेज दर्द होता है कि रोगी उससे कोई चीज उठा नहीं पता है। रोगी का शरीर थका-थका सा रहता है और पूरे शरीर में दर्द होता है विशेषकर टांगे और पैरों में। रोगी जब घुटने को मोड़ता है तो उसमें सूजन आ जाती है। इस प्रकार के शरीर की बाहरी अंगों से सम्बन्धित लक्षणों में से कोई भी लक्षण यदि रोगी को हो गया हो तो उसके रोग को ठीक करने के लिए मैग्नीशिया कार्बोनिका औषधि का उपयोग करना लाभदायक होता है।
त्वचा रोग से सम्बन्धित लक्षण :- रोगी की त्वचा मटमैली, मुरझाई और झुलसी जैसी हो जाती है, हाथों व उंगलियों में खुजली मच रही हो, त्वचा के नीचे गांठें पड़ गई हो तथा शरीर के कई अंगों में दर्द हो रहा हो तो इस प्रकार के लक्षणों को ठीक करने के लिए मैग्नीशिया कार्बोनिका औषधि का उपयोग करना लाभदायक होता है।
बुखार से सम्बन्धित लक्षण :- रोगी को शाम के समय में सर्दी लगती है और रात के समय में बुखार हो जाता है और शरीर से खट्टा तैलीय पसीना आता है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए मैग्नीशिया कार्बोनिका औषधि उपयोग लाभदायक है।
नींद से सम्बन्धित लक्षण :- रोगी का शरीर सुस्त रहता है वह कोई भी कार्य करने में आलस्य करता है, सोते समय की तुलना में जागने पर अधिक थकान महसूस होती है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए मैग्नीशिया कार्बोनिका औषधि लाभदायक है।
नसों में दर्द से सम्बन्धित लक्षण :- यदि रोगी के नसों में तेज दर्द होता है, दर्द इतना तेज हो रहा हो कि रोगी व्यक्ति स्थिर नहीं रह सकता हो और न ही चल पा रहा हो क्योंकि उसे ऐसा करने से आराम मिलता है, रात के समय में वह बिस्तर को छोड़कर टहलता रहता है। जैसे ही रोगी स्थिर खड़ा हो जाता है, वैसे ही दर्द तेज हो जाता है, दर्द काटता, फाड़ता और टीस मारता हुआ महसूस होता है। इस दर्द का असर रोग के चेहरे के बायीं तरफ होता है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए मैग्नीशिया कार्बोनिका औषधि का प्रयोग करना चाहिए।
क्षय (टी.बी.) से सम्बंधित लक्षण :- क्षय रोग से पीड़ित बच्चे को मांस खाने की अधिक इच्छा होना तथा वह बहुत अधिक पतला हो तो उसके रोग को ठीक करने के लिए मैग्नीशिया कार्बोनिका औषधि का उपयोग करना चाहिए।
वृद्धि (ऐगग्रेवेशन) :-
मौसम के तापमान में उतार-चढ़ाव आने से, बिस्तरे की गर्मी से, ठण्डी हवा से, हर तीसरे सप्ताह तथा आराम करने से रोग के लक्षणों में वृद्धि होती है।
शमन (एमेलिओरेशन) :-
गर्म हवा से तथा खुली हवा में टहलने से रोग के लक्षण नष्ट होने लगते हैं।
सम्बन्ध (रिलेशन) :-
कियोजो, एलोज, कीरैन्थस तथा रियूम औषधियों के कुछ गुणों की तुलना मैग्नीशिया कार्बोनिका औषधि से कर सकते हैं।
प्रतिविष :-
आर्से तथा मर्क्यू औषधि का उपयोग मैग्नीशिया औषधि के हानिकारक प्रभाव को नष्ट करने के लिए किया जाता है।
पूरक:-
कमो।
मात्रा (डोज) :-
मैग्नीशिया कार्बोनिका औषधि की तीसरी से तीसवीं शक्ति तक का प्रयोग रोग के लक्षणों को ठीक करने के लिए करना चाहिए।
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें