स्पाइजिलिया एथलमिण्टिका Spaijiliya Athlmintica
परिचय-
स्पाइजिलिया एथलमिण्टिका औषधि को दिल के रोगों की एक बहुत ही गुणकारी औषधि माना जाता है। दिल के रोगों में जब रोगी के दिल की धड़कन बहुत तेज हो जाती है तब इस औषधि को प्रयोग करने से लाभ मिलता है। दिल के रोगों के अलावा ये औषधि दिल के कपाटों के रोग में बहुत अच्छा असर करती है। विभिन्न रोगों के लक्षणों के आधार पर स्पाइजिलिया एथलमिण्टिका औषधि का उपयोग-
सिर से सम्बंधित लक्षण- रोगी के सिर के पीछे के हिस्से में एक तरफ दर्द होना जो सिर के पीछे के भाग मे रुककर सामने की ओर आकर बाईं आंख पर आकर रुक जाता है। थोड़े से शोर-शराबे से ही रोगी का सिरदर्द बढ़ जाता है। रोगी का सिरदर्द सुबह सूरज उगने के साथ तेज होता है और शाम को सूरज ढलने के साथ ही कम हो जाता है। इस तरह के लक्षणों में अगर रोगी को स्पाइजिलिया एथलमिण्टिका औषधि दी जाए तो रोगी कुछ ही समय में स्वस्थ हो जाता है।
आंखों से सम्बंधित लक्षण- आंखों के रोगों के लक्षणों में रोगी को ऐसा महसूस होता है जैसे कि उसकी आंखों के अंदर के गोले काफी बड़े होकर आंखों से बाहर आ रहे हो, रोगी की पलकों में बहुत तेज दर्द होना, आंखों से हर समय पानी बहते रहना आदि लक्षणों के आधार पर रोगी को स्पाइजिलिया एथलमिण्टिका औषधि देने से लाभ मिलता है।
वृद्धि-
ज्यादा शोर-शराबे से, हिलने-डुलने से, सांस लेने पर, आंख को हिलाने पर, बारिश के मौसम में, ठण्डे मौसम में तथा सूरज उगने पर रोगी का रोग बढ़ जाता है।
शमन-
चुपचाप पड़े रहने पर, सूखी हवा में तथा सूरज के ढलने के साथ ही रोगी का रोग कम होने लगता है।
तुलना-
स्पाइजिलिया एथलमिण्टिका औषधि की तुलना चायना, स्पाइजिलिया तथा बेलेडोना से की जा सकती है।
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