होम्‍योपैथी चिकित्‍सा के जन्‍मदाता सैमुएल हैनीमेन है

होम्योपैथी एक विज्ञान का कला चिकित्सा पद्धति है। होम्योपैथिक दवाइयाँ किसी भी स्थिति या बीमारी के इलाज के लिए प्रभावी हैं; बड़े पैमाने पर किए गए अध्ययनों में होमियोपैथी को प्लेसीबो से अधिक प्रभावी पाया गया है। होम्‍योपैथी चिकित्‍सा के जन्‍मदाता सैमुएल हैनीमेन है।

भारत होम्योपैथिक चिकित्सा में वर्ल्ड लीडर हैं।

होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति की शुरुआत 1796 में सैमुअल हैनीमैन द्वारा जर्मनी से हुई। आज यह अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी में काफी मशहूर है, लेकिन भारत इसमें वर्ल्ड लीडर बना हुआ है। यहां होम्योपथी डॉक्टर की संख्या ज्यादा है तो होम्योपथी पर भरोसा करने वाले लोग भी ज्यादा हैं।

होम्योपैथी मर्ज को समझ कर उसकी जड़ को खत्म करती है।

होम्योपैथी मर्ज को समझ कर उसकी जड़ को खत्म करती है। होम्योपैथी में किसी भी रोग के उपचार के बाद भी यदि मरीज ठीक नहीं होता है तो इसकी वजह रोग का मुख्य कारण सामने न आना भी हो सकता है।

होम्योपथी दवा मीठी गोली में भिगोकर देते हैं

होम्योपथी हमेशा से ही मिनिमम डोज के सिद्धांत पर काम करती है। इसमें कोशिश की जाती है कि दवा कम से कम दी जाए। इसलिए ज्यादातर डॉक्टर दवा को मीठी गोली में भिगोकर देते हैं क्योंकि सीधे लिक्विड देने पर मुंह में इसकी मात्रा ज्यादा भी चली जाती है। इससे सही इलाज में रुकावट पड़ती है।

डॉक्टरी परामर्श से इसका सेवन किसी भी दूसरे मेडिसिन के साथ कर सकते हैं।

होम्योपैथी की सबसे खास बात है कि आप डॉक्टरी परामर्श से इसका सेवन किसी भी दूसरे मेडिसिन के साथ कर सकते हैं। इससे किसी भी तरह का कोई साइड इफेक्ट होने का खतरा नहीं होता।

जकारैण्डा Jacaranda

 जकारैण्डा Jacaranda

परिचय-

जकारैण्डा औषधि पुरुषों को होने वाले कुछ रोगों में बहुत असरदार साबित होती है। इसके अलावा गठिया का रोग, सुबह के समय उल्टी होना, पेशाब से सम्बंधित रोगों के लक्षणों में भी ये औषधि बहुत अच्छा असर करती है। विभिन्न रोगों के लक्षणों के आधार पर जकारैण्डा औषधि से होने वाले लाभ-

सिर से सम्बंधित लक्षण-

रोगी को सर्दी-जुकाम लगने के कारण सिर भारी हो जाता है, आंखों में तेजी से दर्द होने के साथ जलन और पानी भी निकलता रहता है, रोगी बैठा हो और अगर अचानक से उठता है तो उसको चक्कर आने के साथ-साथ सिर भी भारी हो जाता है, इस तरह के लक्षणों में रोगी को जकारैण्डा औषधि देने से लाभ मिलता है।

गले से सम्बंधित लक्षण -

गले में भोजन की नली के अन्दर छाले से महसूस होना, गले में खुश्क हो जाना, सिकुड़ सा जाना और दर्द होना जैसे लक्षणों में जकारैण्डा औषधि बहुत ही उपयोगी साबित होती है।

पेशाब से सम्बंधित लक्षण -

पेशाब करने के रास्ते में जलन सी महसूस होना, पेशाब करने के रास्ते से पीले रंग के स्राव का आना जैसे लक्षणों में जकारैण्डा औषधि बहुत ही प्रभावशाली साबित होती है।

पुरुषों से सम्बंधित लक्षण -

पुरुष के लिंग में बहुत तेज जलन और दर्द होना, लिंग के मुंह की चमड़ी का पीछे की ओर न होना, लिंग के मुंह पर सूजन के साथ दर्द होना, गर्मी के कारण लिंग पर जख्म होना, लिंग के ऊपर छोटी-छोटी सी फुंसियां निकलना जिनमें हर समय खुजली सी होती रहती है आदि पुरुष रोग से सम्बंधित लक्षणों में जकारैण्डा औषधि बहुत ही उपयोगी साबित होती है।

शरीर के बाहरी अंगों से सम्बंधित लक्षण -

रोगी के दाएं घुटने में गठिया का दर्द होना, कमर के भाग में कमजोरी सी आना, सुबह के समय पेशियों के अकड़ जाने के कारण दर्द होना, हाथों के ऊपर खुजली वाली फुंसियां निकलना, सूजाक और उपदंश के कारण उत्पन्न जोड़ों की सूजन जैसे लक्षणों में रोगी को जकारैण्डा औषधि देने से लाभ मिलता है।

तुलना-

जकारैण्डा औषधि की तुलना मर्ककॉर, थूजा, कोलैल, रूब और मर्क स औषधियों से की जा सकती है।

मात्रा-

रोगी के लक्षण जानकर अगर उसके मुताबिक जकारैण्डा औषधि की मूलार्क या 6x शक्ति तक दी जाए तो रोगी कुछ ही समय में ठीक हो जाता है।


जलापा-एक्सोगोनियम पर्गा Jalapa-Exogonium Purga

 जलापा-एक्सोगोनियम पर्गा Jalapa-Exogonium purga

परिचय-

जलापा-एक्सोगोनियम पर्गा औषधि बच्चों के बहुत से रोगों के लिए काफी असरदार होती है। जो बच्चे पूरे दिन अच्छी तरह से खेलते-कूदते रहते हैं और रात होते ही चीखने-चिल्लाने लगते है, बेचैन रहते है और पूरी रात परेशान करते है, उनके लिए ये औषधि बहुत ही अच्छी रहती है। विभिन्न रोगों के लक्षणों में जलापा-एक्सोगोनियम पर्गा औषधि का उपयोग-

आमाशय से सम्बंधित लक्षण-

बच्चे के पेट में तेज दर्द होना, पेट का फूल जाना, जी मिचलाना, जीभ का कोमल, चिकनी और सूखी सी होना, मलद्वार में दर्द होना, रोगी का चेहरा नीला और ठण्डा होना, दस्त का पानी जैसे पतले रूप में आना आदि लक्षणों में रोगी को जलापा-एक्सोगोनियम पर्गा औषधि देने से लाभ होता है।

शरीर के बाहरी अंगों से सम्बंधित लक्षण -

रोगी की बांहों और टांगों में हल्का-हल्का सा दर्द होना,पैरों के तलुवों में जलन सी होना, पैर के अंगूठे के बड़े जोड़ पर चसचसाहट सी होना आदि लक्षणों के आधार पर रोगी को जलापा-एक्सोगोनियम पर्गा औषधि प्रयोग कराने से आराम मिलता है।

प्रतिविष-

इलैटेरि, कैना-सैटा।

तुलना-

जलापा-एक्सोगोनियम पर्गा औषधि की तुलना कैम्फ-कोलो से की जा सकती है।

मात्रा-

रोगी को जलापा-एक्सोगोनियम पर्गा औषधि 3 से 12 शक्ति तक देने से लाभ मिलता है।


जेबोरैण्डी (जेबोरै) Jaborandi

 जेबोरैण्डी (जेबोरै) Jaborandi

परिचय-

जब कोई व्यक्ति अपनी पुरानी बीमारी का इलाज करवाता है तो उसके स्वास्थ्य में सुधार होते समय उसको बहुत ज्यादा मात्रा में पसीना आता है उस समय जेबोरैण्डी औषधि का उपयोग काफी असरकारक होता है। इसके अलावा गर्भावस्था में, मधुमेह रोग में भी रोगी को बहुत ज्यादा पसीना आना, मुंह का सूखना, बार-बार प्यास का लगना आदि में भी इस औषधि का इस्तेमाल किया जाता है। विभिन्न रोगों के लक्षणों के आधार पर जेबोरैण्डी औषधि का उपयोग-

आंखों से सम्बंधित लक्षण-

रोगी को मोतियाबिन्द होने के कारण आंखों से न दिखाई देना, आंखों से हर समय आंसू निकलते रहना, आंखों का ऑप्रेशन कराने के बाद आंखों में कई तरह की परेशानियां आ जाना, आंख की पुतलियों का सिकुड़ जाना, पलकों की बंधनी पेशियों में दर्द होना जैसे लक्षणों में जेबोरैण्डी औषधि का उपयोग लाभकारी होता है।

स्त्री रोगों से सम्बंधित लक्षण-

यौवनारंभ काल में लड़की की यौन उत्तेजना तेज होना, हाथ-पैरों का ठण्डा हो जाना, बहुत ज्यादा पसीने का आना जैसे लक्षणों में स्त्री को जेबोरैण्डी औषधि का इस्तेमाल कराने से लाभ मिलता है।

मुंह से सम्बंधित लक्षण-

मुंह और गले का बहुत ज्यादा सूखना, बार-बार तेजी से प्यास का लगना, खून का बहाव बढ़ जाना लेकिन नसों का तनाव और ताप का गिर जाना आदि लक्षणों में जेबोरैण्डी औषधि लेने से लाभ मिलता है।

तुलना-

जेबोरैण्डी औषधि की तुलना एमिल नाई नामक औषधि से की जा सकती है।

मात्रा-

रोगी को उसके रोग के लक्षणों के आधार पर जेबोरैण्डी औषधि की मात्रा देने से लाभ मिलता है।

जानकारी-

जेबोरैण्डी औषधि शरीर के अन्दर लार और पसीना निकालने वाली ग्रन्थियों में क्रिया प्रकट करके उन ग्रन्थियों में काफी समय तक जलन पैदा करती है, जिसमें से हर समय लार बहती रहती है और पसीना आता रहता है। नाक से स्राव और आंखों से काफी मात्रा में पानी गिरता रहता है।


इलाटेरियम Elaterium

 इलाटेरियम Elaterium

परिचय-

इलाटेरियम औषधि का प्रयोग अनेक प्रकार के रोगों को दूर करने में किया जाता है परन्तु इलाटेरियम औषधि मुख्य रूप से श्लेष्मिक परतों पर क्रिया करती है जिसके परिणाम स्वरूप श्लेष्मकला से अधिक मात्रा में तरल और लिसलिसा कफ निकलता है। वास्तव में इलाटेरियम औषधि पहली बार श्लेष्मकला, गला, नाक, आमाशय और आंखों से निकलने वाली तरल \'श्लेष्म का शोषण करती है जिसके कारण इसकी मुख्य क्रिया आमाशय पर होती है। इसकी क्रिया के फलस्वरूप लक्षण उत्पन्न होते हैं तो आमाशय का तरल रस द्रवित होकर उत्तेजना ला देता है जिसके कारण उल्टी हो जाती है और दस्त आ जाते हैं। अधिक उत्तेजना बनी रहने के कारण उल्टियां हो जाती हैं। शरीर के विभिन्न अंगों में उत्पन्न लक्षणों के आधार पर इलाटेरियम औषधि का उपयोग-

आमाशय से संबन्धित लक्षण :- यदि किसी रोगी को अधिक उबकाइयां आने के साथ पानी की तरह पतले पदार्थो की उल्टियां हो रही है तो रोगी को इलाटेरियम औषधि देने से रोग ठीक होता है।

पेट से संबन्धित लक्षण :- पेट और आंतों में काटने-फाड़ने की तरह दर्द होने के साथ मरोड़ पैदा होने पर रोगी को इलाटेरियम औषधि का सेवन करना चाहिए।

दस्त से संबन्धित लक्षण :- पानी की तरह पतले दस्त अधिक मात्रा में आना आदि रोगों में इलाटेरियम औषधि देनी चाहिए। यदि किसी रोगी को पानी की तरह झागदार या हरे रंग का दस्त आता हो तो ऐसे लक्षणों में रोगी को इलाटेरियम औषधि देने से रोग ठीक होता है।

बाहरी अंगों से संबन्धित लक्षण :- यदि रोगी के बांयें कूल्हे से पैर के अंगूठे तक हल्की पीड़ा हो रही हो या तेज दर्द हो रहा हो तो रोगी को इलाटेरियम औषधि का सेवन कराने से दर्द में जल्द आराम मिलता है।

तुलना :-

इलाटेरियम औषधि की तुलना काल्चि, क्रोटा-टि, कालो ग्रेटि, सिके तथा वेरेट्रम-ए औषधि से की जाती है।

विशेष :-

* यदि रोगी को हैजा रोग की तरह अधिक तेज दस्त के साथ उल्टियां आती हैं जिसमें दस्त अधिक मात्रा में झागदार व हल्के हरे रंग का होता है तो ऐसे में रोगी को इलाटेरियम औषधि देने से जल्द लाभ मिलता है। 

* यदि किसी रोगी के गुर्दे की सूजन हो तो रोगी को इलाटेरियम औषधि देनी चाहिए परन्तु ध्यान रखें कि रोगी में ऊपर के लक्षण भी होना चाहिए।

* यदि रोगी में उबकाई व उल्टियों के साथ जिगर के आस-पास सूजन और पीलिया रोग हो गया है तो रोगी को इलाटेरियम औषधि देना लाभकारी होता है।

* यदि शरीर में तेज गर्म के साथ रोगी को उबकाइयां व उल्टियां आती है या ग्रधृसी (साइटिका) में असहनीय दर्द होता है तो रोगी को इलाटेरियम औषधि देनी चाहिए।


इस्क्युलस हिपोकैस्टेनम ISQYALS HIPOKAISVEUM

 इस्क्युलस हिपोकैस्टेनम ISQYALS HIPOKAISVEUM 

परिचय-

इस्क्यूलस हिपोकैस्टेनम औषधि रक्तवाहिनी नाड़ियों पर विशेष रूप से क्रिया करती है और उससे संबन्धित लक्षणों को समाप्त करती है। यह औषधि शरीर के विभिन्न अंगों और शिराओं से संबन्धित लक्षणों को दूर करने में अधिक लाभकारी होती है। त्रिक-प्रदेश (रीढ़ की हडडी के नीचे का भाग) के अन्दर हल्की-हल्की पीड़ा होने पर इस औषधि का प्रयोग करने से दर्द से आराम मिलता है। कमर में दर्द जो झुकने या चलने पर बढ़ जाते हैं। बवासीर, श्वेत प्रदर तथा गर्भाशय की झिल्ली के अपने स्थान से हट जाने के कारण उत्पन्न दर्द। ऐसे दर्द में भी इस्क्यूलस हिपोकैस्टेनम औषधि का प्रयोग किया जाता है। यदि किसी रोगी को मलाशय में भारीपन के साथ ऐसा महसूस होता है जैसे मलाशय में कुछ चुभन की तरह दर्द हो रहा हो तो ऐसे दर्द में इस्क्यूलस हिपोकैस्टेनम औषधि का प्रयोग करना चाहिए।

यदि गला, गर्दन, मुंख तथा मलाशय की श्लैष्मिक झिल्लियों में सूजन आ गई हो और उसमें जलन, गर्मी, सूखापन तथा उधड़न महसूस होने के साथ घाव बनने जैसा महसूस होता है तो ऐसे में रोगी को इस्क्यूलस हिपोकैस्टेनम औषधि देने से लाभ होता है। इसके अतिरिक्त अन्य लक्षणों में इस्क्यूलस हिपोकैस्टेनम औषधि का प्रयोग लाभकारी होता है।

शरीर के विभिन्न अंगों से संबन्धित लक्षणों के आधार पर इस्क्यूलस हिपोकैस्टेनम औषधि का उपयोग :-

सांस संस्थान से संबन्धित लक्षण :- जुकाम अधिक होने के कारण नाक से अधिक मात्रा में पानी की तरह पतला बलगम निकलना तथा नाक से बलगम निकलने के साथ नाक में जलन होना तथा ठण्डी हवा में सांस लेने से नाक में जलन और बढ़ जाना। रोगी को बार-बार थूक निगलने की इच्छा होना। गले में जलन तथा डंक मारने जैसा दर्द होना। गले के अन्दर सूखापन और सिकुड़ापन महसूस होना। इस तरह के उत्पन्न होने वाले लक्षणों को ठीक करने के लिए रोगी को इस्क्यूलस हिपोकैस्टेनम औषधि देनी चाहिए। इस औषधि के सेवन से यह औषधि सांस संस्थान पर तेजी से क्रिया कर रोग को जल्दी ठीक करता है।

पीठ से संबन्धित लक्षण :- इस्क्यूलस हिपोकैस्टेनम औषधि पीठ के निचले भाग पर विशेष रूप से क्रिया करती है। यह पीठ में लगातार धीमा-धीमा दर्द होने के साथ कूल्हे और त्रिकप्रदेश (रीढ़ की हडडी के नीचे का भाग) में दर्द महसूस होना तथा चलने या झुकने से दर्द का अधिक बढ़ जाना। ऐसे लक्षणों में रोग को ठीक करने के लिए इस्क्यूलस हिपोकैस्टेनम औषधि का प्रयोग किया जाता है।

मलाशय से संबन्धित लक्षण :- इस औषधि का प्रयोग बवासीर रोग में करने से लाभकारी होता है विशेष रूप से बवासीर की उस अवस्था में जब मलद्वार में मस्से निकल आते हैं। पीठ दर्द के साथ-साथ मलद्वार में भारीपन और सूखापन महसूस होना तथा ऐसा महसूस होना मानो कोई गोल पदार्थ मलद्वार में चुभ रही हो तो ऐसे लक्षणों में रोगी को इस्क्यूलस हिपोकैस्टेनम औषधि के प्रयोग से रोग दूर होता है। यह औषधि कांच का निकलना (गुदाभ्रंश) आदि को भी ठीक करता है। यदि किसी रोगी में बवासीर रोग के साथ कमर दर्द तथा भारीपन जैसे लक्षण उत्पन्न हो तो रोगी को इस्क्यूलस हिपोकैस्टेनम औषधि देनी चाहिए। मलद्वार में चोट लगने की तरह दर्द होने पर भी इस औषधि का सेवन करना चाहिए।

स्त्री रोग से संबन्धित लक्षण :- इस औषधि का प्रयोग गर्भाशय के अपने स्थान से हट जाने तथा जलन होने पर भी किया जाता है। श्वेतप्रदर (योनि से सफेद रंग का स्राव होना) में भी इस्क्यूलस हिपोकैस्टेनम औषधि का प्रयोग लाभकारी होता है। 

सर्दी-जुकाम से संबन्धित लक्षण :- यदि सर्दी लगने के साथ गले में भी दर्द रहता हो तो उसे इस्क्यूलस हिपोकैस्टेनम औषधि का सेवन कराना चाहिए। कुछ अन्य लक्षणों में इस्क्यूलस हिपोकैस्टेनम औषधि के स्थान पर आर्सेनिक औषधि का भी प्रयोग किया जा सकता है जैसे- सर्दी के साथ पतले पानी की तरह नजला आना। सांस के द्वारा अन्दर जाने वाली ठण्डी हवा से उत्पन्न होने वाली परेशानी तथा उधड़ने की तरह दर्द होना। नए या पुराने गले का दर्द जिसमें खाल निचोड़ने जैसा महसूस होता है तथा साथ ही स्वरयन्त्र की पुरानी जलन आदि लक्षण। इस तरह के लक्षणों में से कोई भी लक्षण उत्पन्न होने पर रोगी को ठीक करने के लिए इस्क्यूलस हिपोकैस्टेनम औषधि दी जा सकती है।

मात्रा :-

इस्क्यूलस हिपोकैस्टेनम औषधि 3 शक्ति से उच्च शक्ति का प्रयोग किया जाता है।


इग्नेशिया IGNATIA

 इग्नेशिया IGNATIA

परिचय-

इग्नेशिया औषधि बच्चों के रोग तथा स्त्रियों में उत्पन्न होने वाले हिस्टीरिया रोग में अत्यन्त लाभकारी होती है। यह औषधि विशेष रूप से उन स्त्रियों के हिस्टीरिया रोग में अधिक लाभकारी होती है जो सुशील, अधिक कार्य करने वाली तथा नाजुक होती हैं। हिस्टीरिया रोग स्त्री में उत्पन्न होने वाले ऐसे रोग हैं जिसे समझ पाना अत्यन्त कठिन है। हिस्टीरिया रोग ऐसी स्त्रियों में होता है जो अधिक संवेदनशील रहती है, बात-बात पर उत्तेजित हो जाती हैं, जिनका रंग सांवला व स्वभाव कोमल होता है, जिनकी बुद्धि तेज होती है तथा किसी बात को आसानी से समझ लेती है। मानसिक या शारीरिक विकास में रुकावट पैदा होने के साथ स्वभाव परिवर्तन। हर बातों का विरोध करना। चलाक, स्नायविक, \'शंकालु, कठोर, कंपायमान जो मानसिक अथवा शारीरिक रूप से बुरी तरह पीड़ित रहती है तथा कॉफी पीने से रोग में आराम मिलता है।

उपरस्थि (सुपरफिसीयल) एवं चलायमान रूप इस औषधि की मुख्य विशेषता है। यह औषधि शोक व चिन्ता आदि को दूर करने में लाभकारी है। त्वचा पर छोटे-छोटे गोलाकार धब्बे बनने पर इग्नेशिया औषधि का प्रयोग किया जाता है। यह औषधि प्लेग, हिचकी और वातोन्माद वमन आदि को भी दूर करती है।

इग्नेशिया औषधि का प्रयोग किसी प्रकार के रोगों में करने के बाद रोगी का रोग तम्बाकू पीने से, शराब पीने से, आंखों की हरकतों से, झुकने से तथा शोर करने से बढ़ता है।

करवट बदलने से तथा रोगग्रस्त अंगों की तरफ लेटने से रोग में आराम मिलता है।

शरीर के विभिन्न अंगों में उत्पन्न लक्षणों के आधार पर इग्नेशिया औषधि का उपयोग :-

मन से संबन्धित लक्षण :- रोगी का स्वभाव बदलने के साथ रोगी में चिन्ता, शोक, अपने ही विचारों में खोया रहना, गम्भीर स्वभाव, दु:खी रहना तथा गुस्सा करना आदि लक्षण उत्पन्न होना। कितनी भी परेशानी हो रोगी अपनी परेशानी दूसरे को नहीं बताता है। इस तरह के लक्षण वाले रोगी को इग्नेशिया औषधि का सेवन कराने से रोग ठीक होता है। इसके अतिरिक्त रोगी में अन्य लक्षण जैसे- लोगों से बात करने की इच्छा न करना। आहें और सिसकियां भरना तथा आघात (Shocks) शोक, निराशा के लक्षणों में इग्नेशिया औषधि का प्रयोग किया जाता है।

सिर से संबन्धित लक्षण :- सिर में खोखलापन व भारीपन महसूस होना, सिर दर्द तथा सिर दर्द झुकने से बढ़ जाना। सिर दर्द होने के साथ ऐसा महसूस होता है कि अन्दर से बाहर की ओर कील निकल रही है। नाक की जड़ में ऐंठन सा दर्द होना। अधिक बोलने या गुस्सा करने के बाद होने वाला सिर दर्द जो धूम्रपान करने या तम्बाकू की गंध सूंघने से बढ़ता है। सिर आगे की ओर झुका हुआ महसूस होता है। इस तरह के लक्षणों के साथ होने वाले सिर दर्द को दूर करने के लिए इग्नेशिया औषधि का प्रयोग करने से रोग में आराम मिलता है।

आंखों से संबन्धित लक्षण :- यदि किसी रोगी को कम दिखाई देता है और साथ ही उसकी पलकें लटक रही हैं और आंखों के आस-पास वाली तन्त्रिकाओं में दर्द हो रहा है तो आंखों के ऐसे लक्षणों में इग्नेशिया औषधि का प्रयोग करना चाहिए। इस औषधि के प्रयोग से रोग ठीक होता है। आंखों के चारों ओर आड़ी-तिरछी लकीरें व धब्बे आने पर भी इग्नेशिया औषधि का प्रयोग लाभकारी होता है।

चेहरे से संबन्धित लक्षण:- चेहरे तथा होठों की पेशियों का कंपकंपाना। आराम करते समय चेहरे का रंग बदल जाना आदि लक्षणों में इग्नेशिया औषधि का प्रयोग करने से लाभ होता है।

मुंह से संबन्धित लक्षण :- मुंह का स्वाद खट्टा होना। गालों का अन्दरूनी भाग दांतों से कट जाना। मुंह से लार का अधिक निकलना। दांतों का दर्द जो कॉफी पीने तथा धूम्रपान करने से शान्त रहता है। इस तरह के लक्षणों में रोगी को इग्नेशिया औषधि देनी चाहिए।

गले से संबन्धित लक्षण :-

* गले के अन्दर कुछ अटका हुआ महसूस होता है जो न तो अन्दर जा रहा है और न ही बाहर निकल रहा है। ऐसे लक्षण में इग्नेशिया औषधि का सेवन करना चाहिए। 

* गले में घुटन महसूस होना और पेट में वायुगोला महसूस होना। गले में जलन होना तथा लार को निगलने पर गले में सुई चुभने जैसा दर्द होना आदि इस तरह के लक्षण उत्पन्न होने पर रोगी को इग्नेशिया औषधि का सेवन कराना लाभकारी होता है।

* भोजन निगलने पर गले में सुई चुभन जैसा दर्द होता है जो दर्द धीरे-धीरे कानों तक फैल जाता है। गलतुण्डिका में जलन व सूजन आने के साथ उस पर छोटे-छोटे घाव उत्पन्न हो जाते हैं तथा पुटकीय गलतुण्डिका की सूजन आदि। इस तरह के लक्षण उत्पन्न होने पर इग्नेशिया औषधि का प्रयोग करना रोगी के लिए अत्यन्त लाभकारी होता है।


सांस से संबन्धित लक्षण :-

* गले की खुश्की के साथ उत्तेजित कर देने वाली खांसी का आना तथा खांसी के दौरे पड़ना आदि लक्षणों में इग्नेशिया औषधि का प्रयोग लाभकारी होता है। 

* गले में उत्तेजना पैदा होने पर रोगी को इग्नेशिया औषधि का सेवन करना चाहिए परन्तु आवश्यकता पड़ने पर इग्नेशिया औषधि के स्थान पर कल्के औषधि का भी प्रयोग किया जा सकता है।

* किसी रोग के कारण उत्पन्न होने वाली खांसी या प्रतिवर्ष होने वाली खांसी आदि में रोगी को इग्नेशिया औषधि देना लाभकारी है। 

* रोगी में उत्पन्न होने वाली ऐसी खांसी जिसमें रोगी को खांसी आने पर और अधिक खांसने की इच्छा होती है तथा रोगी में आहें भरने वाला स्वभाव उत्पन्न होता है। ऐसे लक्षणों में रोगी को यह औषधि देने से रोग ठीक होता है। 

* रोगी को सांस नली में खोखलापन महसूस होना। मन को उत्तेजित कर देने वाली खांसी उत्पन्न होना। खांसते समय थोड़ी मात्रा में बलगम आना जिसके कारण सांस नली में दर्द पैदा होना तथा शाम के समय खांसी का बढ़ जाना। ऐसे लक्षण वाले रोगी को इग्नेशिया औषधि देनी चाहिए।


स्त्री रोग से संबन्धित लक्षण :- 

* मासिकधर्म काले रंग का तथा समय से पहले अधिक मात्रा या कम मात्रा में आना आदि स्त्री रोगों के लक्षणों में इग्नेशिया औषधि का प्रयोग लाभकारी होता है।

* मासिकधर्म के समय अधिक आलस्य आने के साथ आमाशय और पेट में उत्तेजना वाले दर्द होना आदि लक्षणों में रोगी को इग्नेशिया औषधि का सेवन कराना चाहिए।

* जिन स्त्रियों में सम्भोग की इच्छा कम हो गई हो तथा अधिक शोक-सन्ताप के कारण उदास व दबी हुई रहती हो तो उस स्त्री को इग्नेशिया औषधि का सेवन कराने से रोग ठीक होता है।


आमाशय से संबन्धित लक्षण :- आमाशय रोगग्रस्त होने के कारण रोगी को खट्टी डकारें आना आदि लक्षण उत्पन्न होने पर रोगी को इग्नेशिया औषधि देने से लाभ होता है।

* आमाशय के अन्दर खोखलापन, पेट अधिक फूला हुआ महसूस होना तथा हिचकी का आना आदि लक्षणों में रोगी को इग्नेशिया औषधि देना लाभकारी होता है।

* यदि किसी रोगी को आमाशय के अन्दर ऐंठन सा दर्द महसूस होता है तथा साथ ही दर्द छूने से अधिक हो जाता है तो ऐसे में रोग को इग्नेशिया औषधि देने से रोग समाप्त होता है।

* घर का पौष्टिक भोजन करने की इच्छा न करना तथा बाजार की अधिक मिर्च-मसाले व तली हुई वस्तु अधिक खाने की इच्छा करना आदि लक्षणों वाले रोगी को इग्नेशिया औषधि देनी चाहिए। इससे रोगी की पाचन क्रिया ठीक होती है और रोगी को भोजन अच्छा लगता है।

* यदि रोगी को खट्टी चीजें खाना अधिक पसन्द हो तो भी रोगी को यह औषधि देने से लाभकारी प्रभाव पड़ता है।

* रोगी को दम घुटने जैसा महसूस होने के साथ ऐसी स्थिति उत्पन्न होना कि रोगी स्वयं को आमाशय में डूबता हुआ महसूस कर रहा है तथा आराम के लिए रोगी को गहरी सांस लेनी पड़ती है। ऐसी स्थिति वाले लक्षणों में रोगी को इग्नेशिया औषधि देने से रोग ठीक होता है।

नींद से संबन्धित लक्षण :- यदि रोगी को बहुत कम नींद आती है तथा नींद आते ही रोगी को आंखों में झटके महसूस होने लगते हैं। ऐसे लक्षणों में रोगी को यह औषधि देने से अनिद्रा (नींद का न आना) रोग दूर होता है। यदि रोगी को चिन्ता, डर, भय, रोग, शोक आदि के कारण नींद नहीं आ रही हो तथा साथ ही बाहों में खुजली होती है और अधिक जम्भाइयां आती है तो रोगी में उत्पन्न ऐसे लक्षणों को ठीक करने के लिए इग्नेशिया औषधि का प्रयोग करना अत्यन्त लाभकारी है। यदि रोगी को नींद आने पर डरावने सपने आते हो साथ ही रोगी नींद में ही डरता रहता है और लम्बे समय बाद अचानक डरकर उठता है। ऐसे लक्षणों को दूर करने के लिए इग्नेशिया औषधि का प्रयोग करना चाहिए।

पेट से संबन्धित लक्षण :- यदि रोगी के आतों में गड़गड़ाहट हो। ऊपरी पेट के भाग में कमजोरी महसूस होने जैसे लक्षण। पेट के अन्दर जलन होने वाले लक्षण। पेट के एक ओर अथवा दोनों ओर ऐंठनयुक्त दर्द होने वाले लक्षण। इस तरह के लक्षण यदि रोगी में हो तो इग्नेशिया औषधि का प्रयोग करना चाहिए। इससे रोग में जल्दी आराम मिलता है।

बुखार (फीवर) से संबन्धित लक्षण :- यदि बुखार होने पर रोगी के आन्तरिक अंगों में ठण्ड लग रही हो और बाहर से गर्म करने से रोगी को गर्माहट नहीं मिल रही हो तो ऐसी स्थिति में रोगी को इग्नेशिया औषधि देने से तुरन्त लाभ मिलता है। यदि रोगी को बुखार के साथ खुजली तथा पूरे शरीर में शीतपित्त का अनुभव हो तो रोगी को इग्नेशिया औषधि देनी चाहिए।

मलाशय से संबन्धित लक्षण :- मलाशय के अन्दर ऊपर तक खुजली होने के साथ सुई के चुभने जैसा दर्द होना तथा मलाशय का चिर जाना आदि लक्षणों में रोगी को इग्नेशिया औषधि का प्रयोग कराने से रोग ठीक होता है। यदि रोगी को दस्त त्याग करने में परेशानी होती तथा दस्त कठोर होने के कारण मलत्याग के बाद गुदा सिकुड़ने के साथ मलद्वार में तेज दर्द होता है तो रोगी को इग्नेशिया औषधि देने से आराम मिलता है। यदि किसी रोगी को बवासीर की शिकायत हो और खांसने से बवासीर के मस्से से खून आता हो तथा मलद्वार में सुई के चुभने जैसा दर्द हो तो रोगी को इग्नेशिया औषधि का सेवन कराना चाहिए। इस औषधि के प्रयोग से दर्द व बवासीर के रोग नष्ट होते हैं। यदि किसी रोगी को मलत्याग करते समय मल के साथ खून आता हो और मलद्वार में तेज दर्द होता है तो ऐसे लक्षणों में रोगी को इग्नेशिया औषधि का सेवन कराने से रोग में आराम मिलता है और मल के साथ खून का बहना बन्द होता है। यदि रोगी को ऐसा दर्द महसूस होता है कि कोई तेज हथियार दबाव के साथ अन्दर से बाहर निकला जा रहा हो तो ऐसे लक्षण वाले दर्दों में रोगी को इग्नेशिया औषधि देने से रोग ठीक होता है।

कांच निकलना :- मलत्याग करते समय हल्का सा जोर लगाने पर कांच (गुदा) का बाहर आ जाना आदि में इग्नेशिया औषधि का प्रयोग करने से रोग ठीक होता है। कांच निकलने के लक्षण पाडोफाइलम और रूटा औषधि में भी होते हैं।

मूत्र से संबन्धित लक्षण :- पेशाब का अधिक मात्रा में आना तथा पेशाब पानी की तरह बिल्कुल साफ आना। ऐसे लक्षणों में इग्नेशिया औषधि लाभकारी होती है।

त्वचा से संबन्धित लक्षण (स्कीन) :- यदि त्वचा पर खुजली हो गई है तथा शीत-पित्त का प्रकोप रहता है तो रोगी को यह औषधि लेनी चाहिए। त्वचा रोगग्रस्त होने पर हवा के प्रति अतिसंवेदनशीलता, निस्त्वचन (एक्सकोरीएशन) विशेष रूप से योनि और मुख के चारों ओर त्वचा का उड़ जाना। ऐसे लक्षणों में रोगी को इग्नेशिया औषधि का सेवन करना चाहिए। यह औषधि त्वचा पर तेजी से क्रिया करती है और रोग को समाप्त करती है।

हिचकी के लक्षण :-

भोजन करने के बाद या तम्बाकू के गन्ध से यदि किसी को हिचकी आ जाती है तो उसे इग्नेशिया औषधि का सेवन कराना चाहिए।

वृद्धि :-

सुबह के समय, खुली हवा में, भोजन करने के बाद, कॉफी पीने से, धूम्रपान करने से, तरल पदार्थो का सेवन करने से तथा बाहरी गरमाई से रोग बढ़ता है।

शमन :-

भोजन करते समय तथा शारीरिक स्थिति परिवर्तन करने से रोग में आराम मिलता है।

तुलना :-

इग्नेशिया औषधि की तुलना जिंक, काली-फा, , सिमिसीफ्यू, सीपिया, पैनासिया तथा आर्वेन्सिस से की जाती है।

इन औषधियों का प्रयोग अन्य परिस्थितियों जैसे जठर प्रदेश के ऊपर संवेदनशीलता के साथ खांसी आना तथा भोजन करने की इच्छा न करना आदि लक्षणों में भी किया जाता है।

पूरक :-

इग्नेशिया औषधि का पूरक नेट्रम्यूरि औषधि है।

प्रतिकूल :-

इग्नेशिया औषधि काफिया, नक्स वमिका औषधि के प्रतिकूल है।

प्रतिविष :-

इग्नेशिया औषधि के प्रयोग में असावधानी करने से यदि रोगी को किसी तरह की हानि होती है तो उस हानि को रोकने के लिए पल्साटिला,तथा काक्कू आदि औषधियों का प्रयोग किया जाता है।

मात्रा :-

इग्नेशिया औषधि की 6 से 10 शक्ति का प्रयोग किया जाता है। परन्तु रोग अधिक कष्टकारी होने पर इग्नेशिया औषधि के 200 शक्ति का प्रयोग किया जा सकता है।