होम्‍योपैथी चिकित्‍सा के जन्‍मदाता सैमुएल हैनीमेन है

होम्योपैथी एक विज्ञान का कला चिकित्सा पद्धति है। होम्योपैथिक दवाइयाँ किसी भी स्थिति या बीमारी के इलाज के लिए प्रभावी हैं; बड़े पैमाने पर किए गए अध्ययनों में होमियोपैथी को प्लेसीबो से अधिक प्रभावी पाया गया है। होम्‍योपैथी चिकित्‍सा के जन्‍मदाता सैमुएल हैनीमेन है।

भारत होम्योपैथिक चिकित्सा में वर्ल्ड लीडर हैं।

होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति की शुरुआत 1796 में सैमुअल हैनीमैन द्वारा जर्मनी से हुई। आज यह अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी में काफी मशहूर है, लेकिन भारत इसमें वर्ल्ड लीडर बना हुआ है। यहां होम्योपथी डॉक्टर की संख्या ज्यादा है तो होम्योपथी पर भरोसा करने वाले लोग भी ज्यादा हैं।

होम्योपैथी मर्ज को समझ कर उसकी जड़ को खत्म करती है।

होम्योपैथी मर्ज को समझ कर उसकी जड़ को खत्म करती है। होम्योपैथी में किसी भी रोग के उपचार के बाद भी यदि मरीज ठीक नहीं होता है तो इसकी वजह रोग का मुख्य कारण सामने न आना भी हो सकता है।

होम्योपथी दवा मीठी गोली में भिगोकर देते हैं

होम्योपथी हमेशा से ही मिनिमम डोज के सिद्धांत पर काम करती है। इसमें कोशिश की जाती है कि दवा कम से कम दी जाए। इसलिए ज्यादातर डॉक्टर दवा को मीठी गोली में भिगोकर देते हैं क्योंकि सीधे लिक्विड देने पर मुंह में इसकी मात्रा ज्यादा भी चली जाती है। इससे सही इलाज में रुकावट पड़ती है।

डॉक्टरी परामर्श से इसका सेवन किसी भी दूसरे मेडिसिन के साथ कर सकते हैं।

होम्योपैथी की सबसे खास बात है कि आप डॉक्टरी परामर्श से इसका सेवन किसी भी दूसरे मेडिसिन के साथ कर सकते हैं। इससे किसी भी तरह का कोई साइड इफेक्ट होने का खतरा नहीं होता।

कोलोसिन्थिस COLOCYNTHIS

 कोलोसिन्थिस COLOCYNTHIS

परिचय-

कोलोसिन्थिस औषधि मोटे लोगों के लिए काफी लाभकारी सिद्ध होती है। इसके अलावा जो व्यक्ति बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा होता है, जिन स्त्रियों का मासिकस्राव बहुत ज्यादा मात्रा में आता है उनके लिए भी ये औषधि लाभकारी होती है। 

विभिन्न प्रकार के लक्षणों के आधार पर कोलोसिन्थिस औषधि का उपयोग-

मन से सम्बंधित लक्षण - व्यक्ति का बहुत ज्यादा चिड़चिड़ा हो जाना, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा हो जाना, दूसरों से नफरत करना आदि लक्षणों में रोगी को कोलोसिन्थिस औषधि देने से लाभ होता है।

सिर से सम्बंधित लक्षण - सिर को बाईं तरफ घुमाने पर चक्कर आना, सिर के दोनों तरफ दर्द के साथ उल्टी और जी मिचलाना, माथे में दर्द जो झुकने से, पीठ के बल सोने से या पलकें घुमाने से तेज हो जाता है। इन सिर के रोगों के लक्षणों के आधार पर रोगी को कोलोसिन्थिस औषधि का सेवन कराने से आराम आता है।

आंखों से सम्बंधित लक्षण - आंखों में इस तरह का दर्द होना जैसे आंखों में कुछ चुभ रहा हो, जो दबाव देने से कम हो जाता है, आंखों के गठिया के रोग के कारण होने वाली परेशानी, अधिमंथ विकसित होने से पहले आंखों के गोलों में बहुत तेज दर्द होना आदि लक्षणों में रोगी को कोलोसिन्थिस औषधि खिलाने से लाभ मिलता है।

चेहरे से सम्बंधित लक्षण - चेहरे के बाईं तरफ सूजन और दर्द होना, स्नायु में दर्दके साथ ठण्ड सी महसूस होना, दांतों का लंबा महसूस होना, आमाशय का दर्द जो हमेशा दांत में या सिर में दर्दके साथ आता है आदि लक्षणों में कोलोसिन्थिस औषधि का प्रयोग करने से आराम आता है। 

आमाशय से सम्बंधित लक्षण - मुंह का स्वादबहुत ज्यादा कड़वा होना, जीभ का खुरदरा होना, भूख का ज्यादा लगना, आमाशय में कोई बहुत सख्त चीज पड़ी हुई मालूम होना आदि आमाशय रोग के लक्षणों में रोगी को कोलोसिन्थिस औषधि देने से लाभ होता है।

उदर (पेट) से सम्बंधित लक्षण - पेट में बहुत तेज दर्दहोना, जिसकी वजह से रोगी को पेट हाथों से पेट को दबाना पड़ता है, पेट में दर्द के साथ पिण्डलियों में ऐंठन आना, नाभि के नीचे के भाग में दर्द होना, कुछ भी खाने पर दस्त हो जाना, मल के साथ बदबू का आना आदि पेट के रोगोंके लक्षणों में रोगी को कोलोसिन्थिस औषधि का प्रयोग कराने से आराम मिलता है।

स्त्री से सम्बंधित लक्षण - स्त्री के डिम्बाशय के अंदर किसी चीज के चुभा देने जैसा बहुत तेज दर्द महसूस होना, डिम्बग्रन्थियों में छोटी-छोटी गोल-गोल गांठें होना, नीचे की ओर दबाव के साथ ऐंठन आना आदि स्त्री रोगों के लक्षणों में रोगी स्त्री को कोलोसिन्थिस औषधि का प्रयोग कराने से लाभ मिलता है।

मूत्र (पेशाब) से सम्बंधित लक्षण - पेशाब का बार-बार आना, बदबू के साथ आना, लिंग के छेद में खुजली होना, लिंग में ऐंठन आना, पेशाब करने के दौरान पूरे पेट में दर्द होना, मलत्याग के समय पेशाब करने की नली में जलन होना, पेशाब के साथ सफेद रंग का स्राव आना आदि मूत्ररोगों के लक्षणों में रोगी को कोलोसिन्थिस औषधि देने से लाभ होता है।

शरीर के बाहरी अंगों से सम्बंधित लक्षण - शरीर में सारे अंगों में एकसाथ खिंचाव पैदा हो जाना, दायें कंधे की त्रिकोणिका पेशी में दर्द होना, नितंब में ऐंठन के साथ दर्द होना, नितंबों से घुटनों तक दर्द होना, नितंबों के जोड़ अपनी जगह से हट जाना, जांघ की दाईं ओर नीचे की तरफ दर्द होना, पुट्ठे और कण्डुराओं का सिकुड़ जाना, सुन्नपन और उसके साथ दर्द होना, बाएं घुटनें के जोड़ में दर्द होना आदि लक्षणों के आधार पर रोगी को कोलोसिन्थिस औषधि का प्रयोग कराने से लाभ मिलता है।

वृद्धि-

शाम को, गुस्सा करने से, भोजन करने के बाद, आराम करते समय, हरकत करने से, रोग बढ़ जाता है।

शमन -

मुड़कर, दोहरा हो जाने से, जोर से दबाने से, कॉफी पीने से, गर्म प्रयोगों से, हवा भरने में, पेट के बल लेटने से रोग कम हो जाता है।

प्रतिविष -

काफि, स्टैफिसै (रायल), कमो, औषधियों का उपयोग कोलोसिन्थ औषधि के हानिकारक प्रभाव को नष्ट करने के लिए किया जाता है।

तुलना -

लोबोलिया , डिपोडियम पैकटेटम, डायोस्कोरिया, कमोमि, काक्कूलस, मर्क्यू, प्लम्बम, मैग्नी-फा से कोलोसिन्थिस की तुलना की जा सकती है।

मात्रा-

रोगी को उसके लक्षणों के आधार पर कोलोसिन्थिस औषधि की छठी से तीसवीं शक्ति तक देने से आराम आता है।


कोनियम Conium

 कोनियम Conium

परिचय-

कोनियम पुराने जमाने की एक बहुत ही प्रसिद्ध औषधि है, जिसकी एक दार्शनिक ने बहुत ही खूबसूरत व्याख्या की है। टांगों का कांपना, चलने-फिरने में परेशानी होना, कुछ दूर चलते ही शरीर का जवाब दे देना, कमजोरी, खून की कमी आदि लक्षण जो ज्यादा बुढ़ापे के लक्षण होते हैं इस समय कोनियम औषधि बहुत ही असरदार काम करती है। इसके अलावा मूत्ररोग, याददाश्त का कमजोर हो जाना, जनेन्द्रियों का कमजोर पड़ जाना, मासिकधर्म बंद होने की अवधि में बहुत परेशानी होना, स्त्री और पुरुषों को शादी से पहले होने वाली परेशानियां, सुबह-सुबह बिस्तर छोड़ने का मन न करना, शरीर का टूटा-टूटा सा लगना, नींद न आना आदि लक्षणों में भी ये औषधि अच्छा काम करती है। 

विभिन्न प्रकार के लक्षणों के आधार पर कोनियम औषधि का उपयोग-

मन से सम्बंधित लक्षण - किसी भी चीज को रखकर कुछ ही समय में भूल जाना की कहां रखी है, किसी काम में मन न लगना, किसी से बात करने का मन न करना, दिमाग पर जरा सा जोर पड़ते ही सिरदर्द होना आदि लक्षणों में कोनियम औषधि बहुत अच्छा लाभ करती है और याददाश्त को भी तेज करती है।

सिर से सम्बंधित लक्षण - सिर का अचानक ऐसा लगना कि वह घूम रहा हो, जरा सा भी शोर होते ही सिर में दर्द होना, चक्कर के साथ एकदम बेहोश हो जाना, उल्टी आना, धूप में निकलते ही सिर का ऐसा लगना कि वह जल रहा हो, सिर पर कोई भारी सा वजन रखा हुआ महसूस होना आदि सिर के रोगों के लक्षण नज़र आने पर कोनियम औषधि के सेवन से लाभ होता है।

आंखों से सम्बंधित लक्षण - आंखों की पलकों पर छोटी-छोटी सी फुंसियां निकलना, आंखों की रोशनी का कम होना, आंखों से आंसुओं का बहना, आंख की पेशियों में लकवा मार जाना, मोतियाबिंद हो जाना आदि आंखों के रोगों के लक्षणों में नियमित रूप से कोनियम औषधि का सेवन करने से बहुत लाभ होता है।

कान से सम्बंधित लक्षण - कानों से सुनाई न देना, कानों में से खून जैसा स्राव होना आदि कान के रोगों के लक्षणों में कोनियम औषधि का सेवन करने से कान के सारे रोग ठीक हो जाते हैं।

नाक से सम्बंधित लक्षण - अचानक नाक से नकसीर (नाक से खून आना) आ जाना, नाक में दर्द होना आदि नाक के रोग के लक्षणों में कोनियम औषधि बहुत लाभ करती है।

उदर (पेट) से सम्बंधित लक्षण - जिगर में और उसके आसपास के हिस्से में बहुत तेज दर्द होना, पुराना पीलिया रोग, दाएं अवजठर में दर्द होना, सूजन आना, किसी चीज के पेट में घुसा देने जैसा दर्दनाक दर्द होना आदि पेट के रोगों के लक्षणों में कोनियम औषधि का नियमित सेवन बहुत अच्छा असर करता है।

आमाशय से सम्बंधित लक्षण - जीभ की जड़ में दर्द होना, दर्द के साथ उल्टी आना, कलेजे में जलन होना, लगातार डकारें आना, रात को सोते समय पेट में जलन होना, आमाशय में अम्लपित्त और कलेजे में जलन आदि आमाशय के रोगों के लक्षण प्रकट होने पर कोमानिया औषधि का सेवन करने से लाभ होता है।

मल से सम्बंधित लक्षण - हर थोड़ी-थोड़ी देर बाद मलत्याग के लिए जाने की इच्छा होना, मलत्याग के समय मलातन्त्र में जलन और परेशानी होना, मलत्याग के बाद हर बार शरीर के कांपने के साथ कमजोरी आना आदि लक्षणों के नज़र आने पर तुरन्त ही कोनियम औषधि देने से लाभ होता है।

मूत्र (पेशाब) से सम्बंधित लक्षण - पेशाब करते समय परेशानी होना, पेशाब का रुक-रुककर आना, पेशाब का अपने आप ही बूंदों के रूप में हर समय टपकते रहना आदि मूत्ररोग के लक्षणों में कोनियम औषधि का नियमित रूप से सेवन करने से लाभ होता है।

पुरुष से सम्बंधित लक्षण - पुरुष के अंदर संभोग की इच्छा तेज होने पर भी संभोग क्रिया में सफल न हो पाना, लिंग का कमजोर पड़ जाना, अण्डकोश का सख्त और बढ़ जाना आदि पुरुष रोगों के लक्षणों मे कोनियम औषधि का सेवन करने से लाभ होता है।

स्त्री से सम्बंधित लक्षण - मासिकधर्म का दर्द के साथ आना, स्तनों का ढीला पड़ना और सिकुड़ना, स्तनों के निप्पलों में सुई चुभने जैसा दर्द होना, उत्तेजना का बढ़ना, मासिकस्राव समय के बाद में आना और कम मात्रा में आना, योनि के बाहर के हिस्से में खुजली हो जाना, गर्भ का अपने आप ठहर जाना, पेशाब करने के बाद सफेद पानी आना आदि स्त्री रोगों के लक्षणों में स्त्री को नियमित रूप से कोनियम औषधि का सेवन कराने से कुछ समय में उसके सारे रोग दूर हो जाते हैं।

खांसी से सम्बंधित लक्षण - रात को सोते समय बहुत तेज-तेज सूखी खांसी होना, गले में एक जगह पर खराश बढ़ने पर अचानक खांसी हो जाना आदि खांसी के लक्षणों में कोनियम एक बहुत ही लाभकारी औषधि साबित होती है।

पीठ से सम्बंधित लक्षण- दोनों कंधों के बीच पीठ में दर्द होना, रीढ़ की हड्डी में दर्द होना, कमर और कमर के नीचे के हिस्से में दर्द होना आदि लक्षणों के नज़र आने पर रोगी को तुरन्त ही कोनियम औषधि का सेवन कराने से पीठ का हर तरह का दर्द कुछ ही समय में चला जाता है।

शरीर के बाहरी अंगों से सम्बंधित लक्षण - हाथ-पैरों की उंगलियों का सुन्न हो जाना, शरीर का कांपना, जनेन्द्रियों का कमजोर पड़ जाना, हाथों में पसीना आना आदि लक्षणों के प्रकट होते ही रोगी को कोनियम औषधि का सेवन कराने से लाभ होता है।

सांस से सम्बंधित लक्षण - अचानक बहुत तेज सूखी खांसी उठना, खांसते समय गले में दर्द होना, रात को सोते समय बहुत तेज खांसी का चलना, सांस अटक-अटककर आना, छाती में दर्द होना, थोड़ा सा चलते ही सांस तेजी से चलने लगना आदि लक्षणों में कोनियम औषधि रोगी को देने से कुछ ही समय में लाभ हो जाता है।

चर्म (त्वचा) से सम्बंधित लक्षण - बगल की ग्रंथियों में दर्द के साथ पूरे बाजू का सुन्न हो जाना, त्वचा और नाखूनों का पीला पड़ जाना, ग्रंथियों में सुई के चुभने जैसा दर्द होना, रात को सोते समय पसीना ज्यादा आना आदि चर्मरोगों के लक्षणों में कोनियम औषधि बहुत ही लाभकारी साबित होती है।

वृद्धि-

सोने से, सोते समय करवट बदलने से, ब्रह्मचर्य का पालन करने से, मासिकधर्म आने के दिनों या उससे पहले, ठण्ड लग जाने से, शारीरिक या मानसिक परिश्रम करने से रोग बढ़ जाता है।

शमन- 

भूखा रहने पर, अंधेरे में, अंगों को नीचे की ओर लटकाने से, हिलने-डुलने से, दबाव देने से रोग कम हो जाता है।

तुलना-

कोनियम औषधि की तुलना किसी तरह की चोट लगने पर आर्निका और रस-टाक्स के साथ, कैंसर के रोग मे आर्स के तथा ऐस्टेर के साथ और गिल्टियों में सूजन आने पर कैल्क और सोरि के साथ की जाती है।

मात्रा-

रोगी को कोनियम औषधि की छठी से तीसवीं शक्ति तक देने से लाभ मिलता है।

जानकारी-

ग्रंथियों के बढ़ जाने की हालत में और आंशिक लकवा मार जाने की हालत में रोगी को कोनियम औषधि ज्यादा मात्रा में भी दे सकते हैं।


काण्डियुरैंगो Condurango

 काण्डियुरैंगो Condurango

परिचय-

काण्डियुरैंगो औषधि का सेवन करने से भोजन पचाने की क्रिया तेज होती है तथा आमाशय की जिन ग्रंथियों से पाचक रस निकलकर मांस, दाल इत्यादि प्रोटिड-खाद्यों को पचाता है उन सभी ग्लैण्डों पर इस औषधि का सबसे ज्यादा असर पड़ता है। ये औषधि आमाशय के कैंसर के कारण पैदा हुए पेट के दर्द को भी समाप्त करती है। रीढ़ की हड्डी में टी.बी. होने के कारण व्यक्ति के चलने-फिरने की समाप्त हुई शक्ति को भी ये औषधि दुबारा लौटा देती है। 

विभिन्न प्रकार के लक्षणों के आधार पर काण्डियुरैंगो औषधि का उपयोग-

आमाशय से सम्बंधित लक्षण - आमाशय की श्लैष्मिका झिल्ली में पुरानी जलन होना, आमाशय के अंदर जख्म के कारण जलन और दर्द होना, भोजन की नली के सिकुड़ जाने के कारण दर्द होना, भोजन करते ही उल्टी हो जाना आदि आमाशय के रोगों के लक्षणों में काण्डियुरैंगो औषधि का सेवन करने से बहुत जल्दी लाभ होता है।

चर्म (त्वचा) से सम्बंधित लक्षण - मलद्वार की त्वचा का फट जाना, मलद्वार या होठों का कैंसर आदि लक्षणों में काण्डियुरैंगो औषधि का सेवन करने से लाभ होता है।

तुलना-

काण्डियुरैंगो औषधि की तुलना आस्टेरियस, कोनियम, हाइड्रे, आर्से आदि से की जाती है।

मात्रा-

काण्डियुरैंगो की मूलार्क या छाल, भोजन करने से पहले 0.32 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ, अर्बुदों में तीसवीं शक्ति।


कोमोक्लैडिया डेंटाटा Comocladia Dentata

 कोमोक्लैडिया डेंटाटा Comocladia Dentata

परिचय-

कोमोक्लैडिया डेंटाटा औषधि आंखों और त्वचा के रोगों में लाभदायक रहती है। इसके अलावा कमर के नीचे के हिस्से में, पेट में, जोड़ों और घुटनों में दर्द होना आदि लक्षणों में बहुत लाभकारी रहती है। 

विभिन्न प्रकार के लक्षणों में कोमोक्लैडिया डेंटाटा औषधि का उपयोग-

आंखों से सम्बंधित लक्षण- आंखों की रोशनी का कमजोर हो जाना, दांई तरफ की आंख से सिर्फ हल्की सी रोशनी ही दिखाई पड़ना, आंखों की पलकों का स्नायुशूल होने के साथ ऐसा महसूस होना जैसे कि आंखें काफी बड़ी हो गई हैं और बाहर निकल रही हैं ये परेशानी आग के पास बैठने से ज्यादा बढ़ जाती है। इस प्रकार के लक्षणों में कोमोक्लैडिया डेंटाटा औषधि का प्रयोग लाभदायक रहता है।

वक्ष (छाती) से सम्बंधित लक्षण - स्त्री के बाएं तरफ के स्तन की गांठ का फूल जाना और उसमें दर्द होना, खांसी के समय छाती में बाईं ओर दर्द होना और वह दर्द कंधे के जोड़ तक पहुंच जाना आदि लक्षणों में रोगी को कोमोक्लैडिया डेंटाटा औषधि का सेवन कराना लाभदायक रहता है।

चर्म (त्वचा) से सम्बंधित लक्षण - त्वचा पर खुजली के साथ लाल रंग की छोटी-छोटी फुंसियां निकलना, पूरी त्वचा का लाल हो जाना, कोढ़ होना, त्वचा पर लाल लकीरे सी पड़ जाना, छालों या फुंसियों जैसा छाजन होना आदि चर्मरोगों के लक्षणों में रोगी को कोमोक्लैडिया डेंटाटा औषधि देने से लाभ मिलता है।

वृद्धि-

छूने से, गर्मी से, आराम करते समय, रात को रोग बढ़ जाता है।

शमन -

खुली हवा में, खुजली करने से, घूमने-फिरने से रोग कम होता है।

तुलना-

कोमोक्लैडिया डेंटाटा औषधि की तुलना ऐनाकार्डि, यूफोर्बिय, रस से की जा सकती है।

मात्रा-

रोगी को उसके रोग के लक्षणों के आधार पर कोमोक्लैडिया डेंटाटा औषधि की पहली से 30 शक्ति तक देने से लाभ मिलता है।


कन्वैल्लैरिया मैजालिस Convallaria Majalis

 कन्वैल्लैरिया मैजालिस Convallaria Majalis 

परिचय-

कन्वैल्लैरिया मैजालिस औषधि दिल के रोगों में बहुत ही लाभकारी होती है। ये औषधि दिल को सही तरह से काम करने के लायक बनाती है। दिल के रोगों के लक्षणों जैसे दिल का कमजोर पड़ जाना, दिल में खून सही मात्रा में न पहुंच पाना, सांस लेने में परेशानी होना, दिल में पानी भरना, स्नायुतंत्र का कमजोर हो जाना आदि लक्षणों में ये औषधि लाभकारी होती है। 

विभिन्न रोगों के लक्षणों के आधार पर कन्वैल्लैरिया मैजालिस का उपयोग-

दिल से सम्बंधित लक्षण - दिल के रोग के लक्षण जैसे- दिल में जलन होना, सांस लेने में परेशानी होना, दिल का बहुत तेज धड़कना, थोड़ा सा भारी काम करते ही दिल का कांपने लगना, नशे के कारण होने वाले दिल के रोग में रोगी को कन्वैल्लैरिया मैजालिस औषधि का सेवन कराने से लाभ होता है।

ज्वर (बुखार) से सम्बंधित लक्षण - कमर और रीढ़ की हड्डी में ठण्ड लगने के साथ आने वाला बुखार, ठण्ड के समय बार-बार प्यास लगना और दर्द होना, बुखार के दौरान सांस लेने में परेशानी होना आदि बुखार के लक्षणों में रोगी को कन्वैल्लैरिया मैजालिस औषधि का सेवन कराने से आराम आता है।

शरीर के बाहरी अंगों से सम्बंधित लक्षण- कमर के नीचे के हिस्से में दर्द होना, टांग और पैर के अंगूठें में दर्द होना, हाथों का कांपना, घुटनों और कलाईयों में दर्द होते रहना आदि लक्षणों में रोगी को कन्वैल्लैरिया मैजालिस औषधि देने से कुछ ही समय में रोगी को आराम आ जाता है।

मूत्र (पेशाब) से सम्बंधित लक्षण- रोगी को पेशाब कम मात्रा में आना लेकिन बार-बार आना, पेशाब करने की जगह पर हल्का-हल्का सा दर्द होना, ऐसा महसूस होना जैसे कि मूत्राशय फूल गया हो, पेशाब में बदबू आना, शरीर पर सूजन आ जाना आदि मूत्ररोगों के लक्षणों में रोगी को नियमित रूप सें कन्वैल्लैरिया मैजालिस औषधि देने से लाभ होता है।

स्त्री से सम्बंधित लक्षण - स्त्री की योनि और पेशाब करने की नली में जलन या खुजली सी होना, गर्भाशय में दर्द होना, कमर के नीचे के हिस्सों के जोड़ों में दर्द होना, जो टांगों में भी पहुंच जाता है आदि स्त्री रोगों के लक्षणों में स्त्री को कन्वैल्लैरिया मैजालिस औषधि सेवन कराने से लाभ होता है।

तुलना-

कन्वैल्लैरिया मैजालिस औषधि की तुलना डिजिटेलिस, क्रैटिगस और लिलियम से की जा सकती है।

मात्रा-

रोगी को कन्वैल्लैरिया मैजालिस औषधि की तीसरी शक्ति देने से लाभ होता है।

जानकारी-

दिल की धड़कन बंद होने के लक्षणों में मूलार्क की 1 से 15 बूंदों की मात्रा रोगी को देने से लाभ होता है।


कन्वैल्लैरिया मैजालिस Convallaria Majalis

 कन्वैल्लैरिया मैजालिस Convallaria Majalis 

परिचय-

कन्वैल्लैरिया मैजालिस औषधि दिल के रोगों में बहुत ही लाभकारी होती है। ये औषधि दिल को सही तरह से काम करने के लायक बनाती है। दिल के रोगों के लक्षणों जैसे दिल का कमजोर पड़ जाना, दिल में खून सही मात्रा में न पहुंच पाना, सांस लेने में परेशानी होना, दिल में पानी भरना, स्नायुतंत्र का कमजोर हो जाना आदि लक्षणों में ये औषधि लाभकारी होती है। 

विभिन्न रोगों के लक्षणों के आधार पर कन्वैल्लैरिया मैजालिस का उपयोग-

दिल से सम्बंधित लक्षण - दिल के रोग के लक्षण जैसे- दिल में जलन होना, सांस लेने में परेशानी होना, दिल का बहुत तेज धड़कना, थोड़ा सा भारी काम करते ही दिल का कांपने लगना, नशे के कारण होने वाले दिल के रोग में रोगी को कन्वैल्लैरिया मैजालिस औषधि का सेवन कराने से लाभ होता है।

ज्वर (बुखार) से सम्बंधित लक्षण - कमर और रीढ़ की हड्डी में ठण्ड लगने के साथ आने वाला बुखार, ठण्ड के समय बार-बार प्यास लगना और दर्द होना, बुखार के दौरान सांस लेने में परेशानी होना आदि बुखार के लक्षणों में रोगी को कन्वैल्लैरिया मैजालिस औषधि का सेवन कराने से आराम आता है।

शरीर के बाहरी अंगों से सम्बंधित लक्षण- कमर के नीचे के हिस्से में दर्द होना, टांग और पैर के अंगूठें में दर्द होना, हाथों का कांपना, घुटनों और कलाईयों में दर्द होते रहना आदि लक्षणों में रोगी को कन्वैल्लैरिया मैजालिस औषधि देने से कुछ ही समय में रोगी को आराम आ जाता है।

मूत्र (पेशाब) से सम्बंधित लक्षण- रोगी को पेशाब कम मात्रा में आना लेकिन बार-बार आना, पेशाब करने की जगह पर हल्का-हल्का सा दर्द होना, ऐसा महसूस होना जैसे कि मूत्राशय फूल गया हो, पेशाब में बदबू आना, शरीर पर सूजन आ जाना आदि मूत्ररोगों के लक्षणों में रोगी को नियमित रूप सें कन्वैल्लैरिया मैजालिस औषधि देने से लाभ होता है।

स्त्री से सम्बंधित लक्षण - स्त्री की योनि और पेशाब करने की नली में जलन या खुजली सी होना, गर्भाशय में दर्द होना, कमर के नीचे के हिस्सों के जोड़ों में दर्द होना, जो टांगों में भी पहुंच जाता है आदि स्त्री रोगों के लक्षणों में स्त्री को कन्वैल्लैरिया मैजालिस औषधि सेवन कराने से लाभ होता है।

तुलना-

कन्वैल्लैरिया मैजालिस औषधि की तुलना डिजिटेलिस, क्रैटिगस और लिलियम से की जा सकती है।

मात्रा-

रोगी को कन्वैल्लैरिया मैजालिस औषधि की तीसरी शक्ति देने से लाभ होता है।

जानकारी-

दिल की धड़कन बंद होने के लक्षणों में मूलार्क की 1 से 15 बूंदों की मात्रा रोगी को देने से लाभ होता है।